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कितनी चीखें, कितना दर्द, इतने साल में भारत भूला नहीं जलियावाला बाग हत्याकांड! पीएम-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

Anjali Tyagi
13 April 2026 11:48 AM IST
कितनी चीखें, कितना दर्द, इतने साल में भारत भूला नहीं जलियावाला बाग हत्याकांड! पीएम-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
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नई दिल्ली। आज भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख है। आज का दिन ना जानें कितनी चीखें, कितना दर्द, याद दिलाता है। साथ ही आजादी का महत्व और उन शहीदों का बलिदान मन में उतर जाता है। आज ही के दिन जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की एक अत्यंत हृदयविदारक और क्रूर घटना है, जो 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में हुई थी। आज इस नरसंहार को 107 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

जलियांवाला बाग हत्याकांड के का इतिहास

बता दें कि यह घटना बैसाखी के दिन हुई थी। ब्रिटिश सरकार के दमनकारी रॉलेट एक्ट (जिसे 'काला कानून' कहा गया) और राष्ट्रवादी नेताओं डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा आयोजित की गई थी। ब्रिटिश अधिकारी ब्रिगेडियर-जनरल रेजिनाल्ड डायर ने अपने सैनिकों के साथ बाग के एकमात्र संकरे निकास द्वार को बंद कर दिया और बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलाने का आदेश दे दिया।

379 लोग मारे गए

लगभग 10-15 मिनट तक हुई गोलीबारी में 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गए, लेकिन वास्तविक संख्या 1,000 से अधिक मानी जाती है। जान बचाने के लिए कई लोग बाग में मौजूद एक कुएं में कूद गए, जिसे अब 'शहीदी कुआं' कहा जाता है।

घटना का प्रभाव

इस क्रूरता के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई अपनी 'नाइटहुड' (सर) की उपाधि लौटा दी थी। घटना की जांच के लिए हंटर आयोग (हंटर कमिशन) का गठन किया गया था। भारतीय क्रांतिकारी उधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में माइकल ओ'ड्वायर (जो घटना के समय पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे) की गोली मारकर हत्या कर इस नरसंहार का बदला लिया। आज जलियांवाला बाग एक राष्ट्रीय स्मारक है, जहाँ की दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी उस बर्बरता की गवाही देते हैं

पीएम मोदी की भावपूर्ण श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान भारत की अदम्य भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शहीदों का साहस, त्याग और संकल्प आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा। एक अन्य संदेश में पीएम मोदी ने जलियांवाला बाग नरसंहार को विदेशी शासन की बर्बरता का प्रतीक बताते हुए कहा कि शहीदों की वीरता की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि जलियांवाला बाग में प्राण न्यौछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान देशवासियों में आजादी के प्रति नई चेतना और दृढ़ संकल्प का संचार करने वाला रहा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सदैव उनके प्रति कृतज्ञ रहेगा और उनकी देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।



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