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केंद्र-राज्य संबंधों पर सीएम स्टालिन ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों से मांगे सुझाव

DeskNoida
29 Aug 2025 11:30 PM IST
केंद्र-राज्य संबंधों पर सीएम स्टालिन ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों से मांगे सुझाव
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यह पहल उनकी सरकार द्वारा गठित एक समिति के तहत की गई है, जो केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के संतुलन की समीक्षा कर रही है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर केंद्र-राज्य संबंधों पर सुझाव मांगे हैं। यह पहल उनकी सरकार द्वारा गठित एक समिति के तहत की गई है, जो केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के संतुलन की समीक्षा कर रही है।

केंद्र पर आरोप – "शक्तियों का झुकाव बढ़ा"

अपने पत्र में स्टालिन ने कहा कि लगातार हुए संवैधानिक संशोधनों, केंद्रीय कानूनों और नीतियों ने धीरे-धीरे शक्तियों का संतुलन केंद्र सरकार की ओर झुका दिया है।

उन्होंने लिखा: “केंद्र स्तर पर कई मंत्रालय मौजूद हैं जो राज्यों के कार्यों को दोहराते हैं और वित्त आयोग की शर्तों, एक जैसे दिशानिर्देशों और सूक्ष्म प्रबंधन के जरिए राज्यों की प्राथमिकताओं पर प्रभाव डालते हैं।”

"सच्चे संघवाद को मज़बूत करने का समय"

स्टालिन ने कहा कि यह एक निर्णायक क्षण है और अब समय आ गया है कि इन विकासक्रमों की समीक्षा कर एक ऐसा ढांचा तैयार किया जाए, जो सच्चे संघवाद को मज़बूत करे।

उच्च स्तरीय समिति और प्रश्नावली

तमिलनाडु सरकार ने इस उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस कुरियन जोसेफ कर रहे हैं।

समिति के अन्य सदस्य हैं –

• पूर्व इंडियन मरीटाइम यूनिवर्सिटी वाइस-चांसलर के. अशोक वर्धन शेट्टी (IAS)

• तमिलनाडु योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन

समिति ने एक ऑनलाइन प्रश्नावली तैयार की है, जिसे 23 अगस्त को स्टालिन ने केंद्र-राज्य संबंधों पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में लॉन्च किया।

सहयोग का आह्वान

स्टालिन ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों से इस प्रश्नावली का अध्ययन कर विस्तृत जवाब देने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी से एक ऐसा दस्तावेज़ तैयार होगा, जो सभी राज्यों की सामूहिक इच्छाशक्ति को दर्शाएगा और देश की संघीय नींव को मज़बूत करेगा।

राजनीति से ऊपर की पहल

स्टालिन ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि यह प्रयास राजनीति और दलगत हितों से ऊपर है।

“आइए, हम मिलकर अपने संविधान की संघीय भावना को नया जीवन दें और आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसा संघ सौंपें, जो मजबूत और न्यायपूर्ण हो, एकजुट और वास्तव में संघीय हो।”

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