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एक ऐसा अनोखा मंदिर, जहां एक ही मूर्ति में बसे हैं शिव और विष्णु, जानें क्या है नाम और कहां है स्थित...

कर्नाटक के दावणगेरे जिले के हरिहर शहर में स्थित हरिहरेश्वर मंदिर एक ऐसा अनूठा मंदिर है, जहां भगवान शिव और भगवान विष्णु एक ही मूर्ति के रूप में विराजते हैं। यहां के मुख्य देवता 'हरिहर' हैं, जो विष्णु (हरि) और शिव (हर) के संगम का प्रतीक हैं।
मंदिर की मुख्य विशेषताएं
अनोखी मूर्ति: गर्भगृह में स्थापित मूर्ति का दाहिना हिस्सा भगवान शिव का और बायां हिस्सा भगवान विष्णु का है। शिव के हाथ में त्रिशूल और विष्णु के हाथ में शंख व चक्र दिखाई देते हैं।
होयसल वास्तुकला: इस भव्य मंदिर का निर्माण 1223-1224 ईस्वी में होयसल राजा वीर नरसिंह द्वितीय के सेनापति पोलल्वा ने करवाया था। यह मंदिर अपनी जटिल नक्काशी और पॉलिश किए हुए स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है।
तुंगभद्रा का तट: यह ऐतिहासिक मंदिर पवित्र तुंगभद्रा नदी के किनारे बसा हुआ है, जो इसके वातावरण को और भी शांत और आध्यात्मिक बनाता है।
पौराणिक कथा
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गुहासुर नाम के एक राक्षस ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि उसे न तो केवल शिव मार पाएंगे और न ही केवल विष्णु। उसके अत्याचारों को समाप्त करने के लिए, दोनों देवताओं ने मिलकर हरिहर का रूप धारण किया और इसी स्थान पर उस राक्षस का वध किया।
यात्रा के लिए उपयोगी जानकारी
स्थान: यह मंदिर दावणगेरे से लगभग 15 किमी दूर हरिहर शहर में स्थित है।
निकटतम शहर: दावणगेरे और हुबली यहां पहुंचने के लिए प्रमुख शहर हैं।
समय: मंदिर दर्शन के लिए सुबह और शाम का समय सबसे उपयुक्त रहता है




