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माघ पूर्णिमा संगम में पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगा सकते हैं डुबकी लेकिन रखी यह शर्त, जानें क्या कहा

वाराणसी। अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज माघी पूर्णिमा पर संगम में डुबकी लगा सकते हैं। लखनऊ के कुछ उच्चाधिकारियों ने शंकराचार्य से संपर्क कर उन्हें मनाने की कोशिश शुरू कर दी है। अधिकारी शंकराचार्य पर माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान के लिए आग्रह कर रहे हैं। हालांकि अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
शंकराचार्य ने स्नान की बात कही
हालांकि शंकराचार्य ने स्नान करने के लिए कई शर्तें भी अधिकारियों के सामने रख दी हैं। जिसमें मौनी अमावस्या को अभद्रता करने वाले अधिकारी लिखित में माफी मांगें, बटुकों, ब्राह्मणों, साधु-संतों और वृद्धों की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के साथ एफआईआर हो और चारों शंकराचार्यों के स्नान के लिए प्रोटोकॉल बने समेत चार मांग हैं। यह सभी चार मांगें मानने पर ही शंकराचार्य ने स्नान की बात कही है। इसकी पुष्टि शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिय प्रभारी शैलेंद्र योगीराज सरकार ने की है।
सीएम योगी के पास 40 दिन का समय है
यूपी के वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेस करके स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सीएम योगी के पास 40 दिन का समय है, वे गाय को राज्यमाता घोषित करें और गोमांस के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा करें। अगर ये यूपी सरकार नहीं करती है तो 10-11 मार्च को लखनऊ में संत समागम में सीएम योगी आदित्यनाथ को नकली हिंदू घोषित कर देंगे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले कि 1966 वाली स्थिति बन गई है। तब की सरकार ने करपात्री जी महाराज को परेशान किया था जबकि आज सीएम योगी और उनके खास रामभद्राचार्य मेरे खिलाफ योजना बना रहे हैं और परेशान कर रहे हैं।
सरकार ने 15 दिन के बाद भी खारिज नहीं किया
उन्होंने कहा कि मुझसे सरकार की और से कहा गया कि आप शंकराचार्य होने का प्रमाण 24 घंटे के अंदर दें। अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि हमने यूपी सरकार को अपने शंकराचार्य होने का प्रमाण उपलब्ध करा दिए हैं जिसे सरकार ने 15 दिन के बाद भी खारिज नहीं किया है। इससे ये साबित हो गया कि मेरा दावा और और प्रमाण सच्चा है। अब आप के ऊपर सवाल है कि अब आप बताएं कि आप असली हिंदू हैं या नकली हिंदू?




