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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश मामले में केन्द्र ने पीछे खींचा अपना हाथ! कहा- यह मुद्दा केवल लैंगिक समानता का नहीं, आस्था का है

Anjali Tyagi
7 April 2026 12:24 PM IST
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश मामले में केन्द्र ने पीछे खींचा अपना हाथ! कहा- यह मुद्दा केवल लैंगिक समानता का नहीं, आस्था का है
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नई दिल्ली। इन दिनों केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के फैसले पर खूब चर्चा हो रही है। ऐसे में इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। जिसमें केंद्र सरकार ने मासिक धर्म वाली महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का विरोध किया। केन्द्र ने खुलकर कहा कि यह मुद्दा केवल लैंगिक समानता का नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए अदालतें आस्था पर फैसला नहीं कर सकती हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में आज से 9 जजों की बेंच के सामने सबरीमाला पुनर्विचार याचिकाओं से जुड़े एक संदर्भ पर सुनवाई शुरू हुई हैं, जिसमें कोर्ट अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे के तहत ‘आवश्यक धार्मिक प्रथाओं’ के सिद्धांत और आस्था से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमा की जांच करेगा।

केंद्र सरकार ने मासिक धर्म वाली महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का किया विरोध

जानकारी के मुताबिक इस पूरे मामले में लगातार केन्द्र महिलाओं के इस अधिकार का विरोध कर रहा है। केंद्र ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालतें आस्था या विश्वास पर फैसला नहीं कर सकतीं। भगवान अय्यप्पा ब्रह्मचारी हैं और महिलाओं से विमुख रहते हैं, अय्यप्पा भक्त एक अलग ही संप्रदाय हैं।

धार्मिक मानदंडों को संबंधित समुदायों पर छोड़ देना चाहिए

सरकार का तर्क है कि यह मुद्दा केवल लैंगिक समानता का नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। अदालतों को आवश्यक धार्मिक प्रथाओं या देवता के गुणों की पुनर्व्याख्या नहीं करनी चाहिए। केंद्र ने यह भी कहा कि न्यायिक समीक्षा को संवैधानिक सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और धार्मिक मानदंडों को संबंधित समुदायों पर छोड़ देना चाहिए।


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