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HOLI: अलग-अलग रंगों का होता है खास महत्व, जानें क्यों खेला जाता है रंग गुलाल?

नई दिल्ली। होली पर रंग और गुलाल खेलने के पीछे धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक कारण छिपे हैं। यह न केवल खुशी मनाने का तरीका है, बल्कि इसके जरिए हम आपसी मतभेद मिटाकर एक-दूसरे के करीब आते हैं।
होली पर रंग खेलने के प्रमुख कारण
श्रीकृष्ण और राधा का प्रेम
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर चिंतित थे और राधा रानी के गोरे रंग को देखकर अपनी माता यशोदा से शिकायत करते थे। तब यशोदा मैया ने उन्हें सुझाव दिया कि वे राधा के चेहरे पर अपनी पसंद का रंग लगा दें। इसके बाद से ही रंगों की होली खेलने की परंपरा शुरू हुई।
वसंत ऋतु का आगमन
होली सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का प्रतीक है। इस समय प्रकृति भी नए फूलों और हरियाली के साथ रंगीन हो जाती है, जिसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
वैज्ञानिक कारण
ऋतु परिवर्तन के समय शरीर में आलस्य और सुस्ती महसूस होती है। पुराने समय में पलाश (टेसू) के फूल, नीम और हल्दी जैसे प्राकृतिक तत्वों से रंग बनाए जाते थे, जिनका शरीर पर छिड़काव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी और त्वचा को शुद्ध करने वाला माना जाता था।
रंगों का खास महत्व:
होली में इस्तेमाल होने वाला हर रंग एक विशेष संदेश देता है:
लाल रंग: यह रंग प्यार, ऊर्जा, उत्साह और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
पीला रंग: यह समृद्धि, स्वास्थ्य, खुशी और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है।
हरा रंग: यह प्रकृति, हरियाली, नई शुरुआत और प्रगति का प्रतीक है।
नीला रंग: यह शांत शक्ति और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।
केसरिया/नारंगी: यह साहस, बलिदान और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।




