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मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर हुए विवाद ने अब ले लिया है नया मोड़! जानें देश में कितने हैं शंकराचार्य ...

नई दिल्ली। देश में इस समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवाद चल रहा है। दरअसल उन्होंने अपने गुरु के निधन के बाद खुद को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य घोषित किया था, हालांकि अन्य मठों के शंकराचार्य ने उन्हें इस उपाधि से नवाजे जाने पर आपत्ति जताई है। बता दें कि शंकराचार्य की पदवी का इतिहास सीधे आठवीं सदी के संत आदि शंकराचार्य से जाकर जुड़ता है। बहरहाल इस मुद्दे को लेकर सियासत का द्वार खुल चुका है।
कौन-कौन से हैं चार मठ?
ज्योतिर्मठ
उत्तराम्नाय मठ या उत्तर मठ, ज्योतिर्मठ जो कि जोशीमठ में स्थित है। यह बदरिकाश्रम के पास मौजूद है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसी पीठ पर खुद को शंकराचार्य के पद पर होने की घोषणा की हुई है, जिसे लेकर विवाद है।
गोवर्धन मठ
इसी तरह पूर्व दिशा में पूर्वाम्नाय मठ या पूर्वी मठ है, जिसे गोवर्धन मठ कहा जाता है। यह ओडिशा के पुरी में स्थापित है। जिसके वर्तमान शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती हैं।
शृंगेरी मठ, शारदा पीठ
दक्षिण दिशा में स्थापित मठ को दक्षिणाम्नाय मठ या दक्षिणी मठ कहा जाता है। इसे शृंगेरी मठ और शारदा पीठ भी कहते हैं जो कि शृंगेरी, कर्नाटक में स्थित है। जिसके वर्तमान शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ हैं।
द्वारिका मठ
पश्चिम दिशा में आदि शंकराचार्य ने पश्चिमाम्नाय मठ या पश्चिमी मठ की स्थपना की थी। यह द्वारिका पीठ भी कहलाता है जो कि द्वारिका में स्थित है ज्योतिर्मठ के पूर्व शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती इसके भी शंकराचार्य थे। साल 2022 में उनके निधन के बाद से स्वामी सदानंद यहां के शंकराचार्य हैं
आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में की थी चारों मठों की स्थापना
देश में यही प्रमुख चार मठ हैं और इन मठों के ही मुखिया सिर्फ आधिकारिक तौर पर शंकराचार्य हैं। हालांकि देश में इन चार मठों के अलावा भी कई अन्य जगह शंकराचार्य पद लगाने वाले मठ मिलते हैं जो वैदिक परम्परा के अनुसार नहीं हैं, बल्कि खुद ही बना लिए गए हैं। आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में सनातन धर्म और वेदांत के प्रचार के लिए देश के चारों दिशाओं में इन चार मठों की स्थापना की थी। इन मठों के प्रमुखों को शंकराचार्य कहा जाता है, जो आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों का नेतृत्व करते हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद विवाद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने गुरु के निधन के बाद खुद को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य घोषित किया था, लेकिन अन्य मठों के शंकराचार्य उन्हें शंकराचार्य नहीं मानते हैं। इस पद को लेकर विवाद चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है।




