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लोकसभा में आज सामान्य प्रशासन विधेयक 2026 पेश किया जाएगा, कांग्रेस ने सवाल उठाए, इतनी जल्दबाजी क्यों

नई दिल्ली। लोकसभा में आज सामान्य प्रशासन विधेयक 2026 पेश किया जाएगा। इस विधेयक को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक को लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पेश करेंगे। राज्यसभा में भी कई विषयों पर सांसदों का संबोधन होगा। वहीं CAPF बिल की समय-सीमा पर मणिकम टैगोर ने सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया है कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को इसलिए जल्दबाजी में ला रही है, ताकि संसदीय बहस से बचा जा सके।
मणिकम टैगोर ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा
मणिकम टैगोर ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्र सरकार ने सीएपीएफ विधेयक, 2026 को ठीक उसी दिन पेश करने की योजना बनाई है, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी की असम में पूर्व-नियोजित चुनाव रैलियां होनी हैं। उन्होंने कहा कि ये रैलियां काफी पहले से घोषित थीं और इनकी तैयारियां भी पूरी हो चुकी थीं। हमारे सीएपीएफ कर्मियों के अधिकारों और गरिमा को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में जल्दबाजी में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा, इतनी जल्दबाजी क्यों? एक पूर्ण और निष्पक्ष बहस से क्यों बचा जा रहा है? विपक्ष के नेता को हमारे 'जवानों' को प्रभावित करने वाले मुद्दे पर बोलने का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है? यह कोई संयोग नहीं है। यह एक सोचा-समझा संसदीय प्रबंधन है।
विधेयक एक दिन पहले राज्यसभा से पारित हो चुका
यह विधेयक एक दिन पहले राज्यसभा से पारित हो चुका है। विधेयक में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में ग्रुप ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित सामान्य नियमों और इन बलों से जुड़े अन्य नियमों को विनियमित करने का प्रावधान है। इससे पहले सीएपीएफ बिल हंगामे के बीच बुधवार को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया। इस विधेयक का उद्देश्य सातों केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए एक समान नियम बनाना है। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। मांग नहीं माने जाने पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए मदन से वॉकआउट कर गए। वहीं, बुधवार को लोकसभा में जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया। यह विधेयक 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है, जिसका लक्ष्य एक ऐसे शासन ढांचे को स्थापित करना है जो विश्वास और आनुपातिक विनियमन पर आधारित हो।




