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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव हुआ खारिज, 193 सांसदों ने किए थे साइन, जानें विपक्ष के आरोप

नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए 63 राज्यसभा सांसदों द्वारा दिए गए नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। साथ ही लोकसभभा के स्पीकर ने भी इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। यह फैसला Judges Act, 1968 की धारा 3 के तहत लिया गया है।
महाभियोग प्रस्ताव पर किया था साइन
बता दें कि 193 सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने जिस महाभियोग प्रस्ताव पर साइन किया था, उसका नोटिस 12 मार्च को राज्यसभा सभापति को सौंपा गया था। यह देश की आजादी के बाद किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में पहला ऐसा प्रयास था।
मतदाता सूचियों की SIR में अनियमितताएं
वहीं नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 व Judges (Inquiry) Act, 1968 के प्रावधानों के तहत दिया गया था। विपक्षी सांसदों ने इसमें ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण आचरण, मतदाता सूचियों की SIR में अनियमितताएं और अन्य आरोप लगाए थे।
विपक्ष ने SC के कई फैसलों का दिया हवाला
बता दें कि सभापति ने नोटिस और इससे जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा के बाद इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है। इससे महाभियोग की प्रक्रिया रुक गई है। विपक्ष ने विशेष रूप से बिहार में मतदाता सूची के SIR के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण कई मतदाता अपने अधिकार से वंचित रह गए। आरोपों में यह भी कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में काम करते हुए पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। सूत्रों के अनुसार, इन दावों के समर्थन में विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया है।




