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भारतीय अर्थव्यवस्था को मिले अब तक कई शिल्पकार! जानें 1947 से 2025 तक किन-किन दिग्गजों ने संभाली वित्त मंत्रालय की कमान

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की 75 वर्षों से अधिक की यात्रा में केंद्रीय बजट को लेकर कई मोड़ आए है। ये सिर्फ केवल आमदनी और खर्चे का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज रहा है। बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था के 1947 से 2025 तक के सफर में कई दिग्गजों ने वित्त मंत्रालय की कमान संभाली है।
आजादी के बाद के शुरुआती शिल्पकार (1947 - 1960)
आर.के. शनमुखम चेट्टी (1947-1949)
स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री। इन्होंने 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला बजट पेश किया था। उनके बाद एक महीने तक केसी नियोगी ने कमान संभाली।
जॉन मथाई (1948-1950)
इन्होंने गणतंत्र भारत का पहला बजट पेश किया और योजना आयोग की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
सी.डी. देशमुख (1950-1956)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पहले भारतीय गवर्नर और भारत के तीसरे वित्त मंत्री।
सुधारों और रिकॉर्डों का दौर (1960 - 2000)
मोरारजी देसाई (1958-63, 1967-69)
इनके नाम सबसे ज्यादा 10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है।
इंदिरा गांधी (1969-1970)
वित्त मंत्रालय संभालने वाली भारत की पहली महिला (प्रधानमंत्री के रूप में अतिरिक्त प्रभार)।
मनमोहन सिंह (1991-1996)
'उदारीकरण के जनक' माने जाते हैं। 1991 के आर्थिक संकट के दौरान इन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के दरवाजे पूरी दुनिया के लिए खोले।
यशवंत सिन्हा (1990-91, 1998-2002)
इन्होंने बजट पेश करने के पारंपरिक समय (शाम 5 बजे) को बदलकर सुबह 11 बजे किया।
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पी. चिदंबरम (2004-08, 2012-14)
इन्होंने कई बार 'ड्रीम बजट' पेश किए और टैक्स सुधारों पर जोर दिया।
प्रणब मुखर्जी (2009-2012)
राष्ट्रपति बनने से पहले इन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंदी से उबारने में मदद की।
अरुण जेटली (2014-2019)
इनके कार्यकाल में GST (वस्तु एवं सेवा कर) और नोटबंदी जैसे बड़े ऐतिहासिक फैसले हुए।
नर्मला सीतारमण (2019-वर्तमान)
भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री। वे 2025-26 के बजट सहित लगातार 9 बजट पेश कर चुकी हैं।
पंडित जवाहरलाल नेहरू और वित्त मंत्रालय
प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू ने स्वयं दो बार वित्त मंत्रालय की कमान संभाली और बजट पेश करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने।
पहला कार्यकाल: 1 अगस्त 1956 से 30 अगस्त 1956 तक।
दूसरा कार्यकाल: 14 फरवरी 1958 से 22 मार्च 1958 तक।
उन्होंने 1958-59 का केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें उन्होंने इसे 'साधारण' (Pedestrian) बजट कहा था।




