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निचली अदालत का फैसला अंतिम सच्चाई नहीं... केजरीवाल को बरी किए जाने पर सीएम रेखा गुप्ता का तीखा वार!

Shilpi Narayan
27 Feb 2026 9:37 PM IST
निचली अदालत का फैसला अंतिम सच्चाई नहीं... केजरीवाल को बरी किए जाने पर सीएम रेखा गुप्ता का तीखा वार!
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नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविन्द केजरीवाल को शराब नीति मामले में आज कोर्ट से बरी कर दिया गया। जिसके बाद से देश की राजधानी में सियासत भूचाल मचा हुआ है। अब इस मामले में दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे दिल्ली की जनता के गुनाहगार हैं। उन्होंने कहा कि कथित शराब नीति मामले में निचली अदालत का फैसला अंतिम सच्चाई नहीं है, बल्कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है।

कोई पूरी तरह बेगुनाह साबित हो गया

सीएम के अनुसार, सच्चाई अभी पूरी तरह सामने आनी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले को क्लीन चिट बताकर जनता को भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। सीएम ने कहा कि घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय जनता के सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। साथ ही रेखा गुप्ता ने कहा कि अदालत ने अपने आदेश में साक्ष्य के अभाव की बात कही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई पूरी तरह बेगुनाह साबित हो गया। उन्होंने समझाया कि सबूतों की कमी और पूरी तरह दोषमुक्त होना दो अलग बातें हैं।

पुरानी नीति पर यू-टर्न क्यों करना पड़ा

हालांकि सीएम रेखा ने कहा कि मामला अभी उच्च न्यायालय तक जा सकता है और आगे की सुनवाई में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार न्यायपालिका का सम्मान करती है लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी को क्लीन चिट देना सही नहीं है। सीएम रेखा ने शराब नीति को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर नई नीति इतनी ही फायदेमंद थी, तो जांच शुरू होते ही उसे वापस क्यों लिया गया। पुरानी नीति पर यू-टर्न क्यों करना पड़ा। थोक मुनाफा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत क्यों किया गया और इसका फायदा किसे मिला। लाइसेंस व्यवस्था में बदलाव किन हालात में किए गए और उनके पीछे असली कारण क्या थे। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब जनता को मिलना चाहिए।

जनता का भरोसा सरकार की सबसे बड़ी ताकत

सीएम ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में हजारों करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का जिक्र है, जो जनता का पैसा है। जनता का भरोसा किसी भी सरकार की सबसे बड़ी ताकत होता है। अगर उस भरोसे को ठेस पहुंची है तो जवाबदेही तय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो खुद को ईमानदार बताते हैं, उन्हें सवालों से भागना नहीं चाहिए। अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, सच्चाई सामने आएगी और कानून से ऊपर कोई नहीं है। वहीं रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि जांच के दौरान करीब 200 दिनों में 160 से 170 मोबाइल फोन बदले जाने की बात सामने आई। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में फोन बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर संदेह क्यों पैदा हुआ। अगर छिपाने जैसा कुछ नहीं था, तो ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय ने भी इस मामले को गंभीर माना है। जमानत मिलना और क्लीन चिट मिलना अलग-अलग बातें हैं।

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