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एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट की कहानी! जेवर एयरपोर्ट बनाने में कितने रुपये हुए हैं खर्च? जानें किसानों को कैसे मनाया गया

Anjali Tyagi
28 March 2026 11:16 AM IST
एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट की कहानी! जेवर एयरपोर्ट बनाने में कितने रुपये हुए हैं खर्च? जानें किसानों को कैसे मनाया गया
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प्रशासन ने अब तक लगभग 7,000 किसान परिवारों को ₹8,000 करोड़ से अधिक का मुआवजा वितरित किया है।

नोएडा। आज उत्तरप्रदेश के लिए बहुत बड़ा दिन है। दरअसल जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा रहा है। बता दें कि यह एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है। ऐसे में सवाल उठता है कि इसकी लगत कितनी है और आखिर किसानों को जमीन के लिए कैसे मनाया गया था।

जेवर एयरपोर्ट की लागत

बता दें कि एयरपोर्ट के प्रथम चरण के निर्माण में लगभग ₹11,282 करोड़ खर्च हुए हैं। इस विशाल परियोजना के सभी चरणों के पूरा होने तक कुल खर्च लगभग ₹29,560 करोड़ होने का अनुमान है। पहले चरण में रियायतग्राही ने ₹6,876 करोड़ का निवेश किया है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण पर ₹4,406 करोड़ खर्च किए हैं।

जेवर की कहानी: कैसे माने किसान?

जेवर एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही, जिसे संवाद और आकर्षक मुआवजे के जरिए सुलझाया गया। प्रशासन ने अब तक लगभग 7,000 किसान परिवारों को ₹8,000 करोड़ से अधिक का मुआवजा वितरित किया है। पहले चरण में किसानों को ₹2,500 से ₹3,100 प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा मिला, जिसे बाद के चरणों के लिए बढ़ाकर ₹4,300 प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया।

सीएम ने किसानों से किया सीधा संवाद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्थानीय नेतृत्व ने किसानों के साथ कई बार बैठकें और महापंचायतें कीं। किसानों के विश्वास को जीतने के लिए मुआवजे की दरों में समय-समय पर बढ़ोतरी की गई। किसानों को न केवल अपनी जमीन की अच्छी कीमत मिली, बल्कि एयरपोर्ट बनने के बाद स्थानीय युवाओं को पक्की नौकरियों और क्षेत्र में औद्योगिक विकास का भरोसा भी दिया गया।

रातोंरात किसानों की बदली किस्मत

मुआवजे के पैसे से कई किसान रातोंरात करोड़पति बन गए। कई परिवारों को ₹2 करोड़ से लेकर ₹12 करोड़ तक का भुगतान मिला, जिससे उन्होंने आलीशान घर, लग्जरी गाड़ियाँ (जैसे थार और फॉर्च्यूनर) और नई जमीनें खरीदीं। हालांकि, उद्घाटन के समय कुछ किसान संगठन अभी भी अपनी अधूरी मांगों और रोजगार की गारंटी को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

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