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SIR ऑफिसर्स को बंधक बनाने पर SC सख्त! CJI बोले- सरकार का रवैया बेहद ‘लचर’... ममता बनर्जी को लगाई फटकार

Anjali Tyagi
2 April 2026 11:48 AM IST
SIR ऑफिसर्स को बंधक बनाने पर SC सख्त! CJI बोले- सरकार का रवैया बेहद ‘लचर’... ममता बनर्जी को लगाई फटकार
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सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में पूछा कि जब स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी और जज संकट में थे, तब मालदा के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मालदा में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव कार्यालय को घेरने और न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी पर देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने ममता सरकार को कड़ा फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी और जज संकट में थे, तब मालदा के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?

क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक मालदा के मोताबारी में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव कार्यालय को घेर लिया था, जिसके अंदर 7 न्यायिक अधिकारी (इलेक्शन ऑब्जर्वर) लगभग 9 घंटे तक फंसे रहे। इस दौरान बाहर खड़ी उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की गई।

DM और SP ने दूरी क्यों बनाई?

सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में पूछा कि जब स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी और जज संकट में थे, तब मालदा के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) मौके पर क्यों नहीं पहुंचे? कोर्ट ने अधिकारियों की इस अनुपस्थिति को ड्यूटी में बड़ी लापरवाही और न्यायपालिका के प्रति अनादर माना। सीजेआई ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका के सदस्यों को इस तरह बंधक बनाना कानून-व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा- यह घटना न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश है। मालदा के डीएम और एसपी का मौके पर न जाना यह दर्शाता है कि वे इसे गंभीरता से नहीं ले रहे थे। यह सीधे तौर पर अदालत को चुनौती देने जैसा है।

ममता बनर्जी सरकार को आड़े हाथों लिया

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को भी आड़े हाथों लिया। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस मामले में सरकार का रवैया बेहद ‘लचर’ रहा। कोर्ट ने कहा कि हिंसा की इस घटना पर जिस तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह कहीं नजर नहीं आई। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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