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भारत में दूसरी शादी का चलन बढ़ा! आंकड़े जानकर हो जाएंगे हैरान, जानें इसके पीछे वजह

भारत में दूसरी शादी (पुनर्विवाह) के चलन में पिछले कुछ वर्षों में 43% की भारी वृद्धि देखी गई है। 2016 में जहां केवल 11% लोग दोबारा शादी करने के इच्छुक थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 16% हो गई है।
सामाजिक कलंक (Social Stigma) में कमी
समाज में अब तलाक या जीवनसाथी खोने के बाद दूसरी शादी को 'कलंक' के रूप में देखने के बजाय एक नई शुरुआत के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
आत्मनिर्भरता और वित्तीय स्वतंत्रता
युवा और महिलाएं अब अधिक आत्मनिर्भर हैं। वे अकेले रहने के बजाय अपनी पसंद के साथी के साथ जीवन बिताने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कंपैटिबिलिटी (Compatibility) को महत्व
आधुनिक जोड़ों के लिए अब पारंपरिक गुणों (जैसे 36 गुण) से ज्यादा आपसी समझ (Compatibility) और भावनात्मक जुड़ाव मायने रखता है।
बढ़ती जागरूकता और कानूनी सुरक्षा
लोग अब अपने अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हैं। वे एक दुखी रिश्ते में रहने के बजाय गरिमापूर्ण तरीके से अलग होकर दूसरा मौका लेना बेहतर समझते हैं।
मेट्रिमोनियल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म
मेट्रिमोनियल ऐप्स परदूसरी शादी के लिए पंजीकरण में बढ़ोतरी हुई है, जिससे समान विचारधारा वाले साथी ढूंढना आसान हो गया है।
महत्वपूर्ण सांख्यिकी (2025-26 रिपोर्ट के अनुसार)
शादी की औसत उम्र
भारत में अब शादी की औसत उम्र बढ़कर 29 वर्ष हो गई है।
पुरुषों की प्राथमिकता
लगभग 87% पुरुष दूसरी शादी के लिए ऐसी महिलाओं को पसंद कर रहे हैं जो कामकाजी हों या जिनके विचार उनसे मिलते हों।
कानूनी पक्ष
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत, पहली शादी के रहते हुए दूसरी शादी करना गैरकानूनी है और इसके लिए 7 साल तक की जेल हो सकती है। कानूनी रूप से मान्य दूसरी शादी के लिए पहली पत्नी या पति से विधिवत तलाक लेना अनिवार्य है।




