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केंद्रीय बजट से रियल एस्टेट को स्थिरता, मांग और निवेश का नया सहारा, जानें विशेषज्ञों का कहना

Shilpi Narayan
1 Feb 2026 2:29 PM IST
केंद्रीय बजट से रियल एस्टेट को स्थिरता, मांग और निवेश का नया सहारा, जानें विशेषज्ञों का कहना
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नई दिल्ली। केंद्रीय बजट में किए गए प्रावधान रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्थिरता और दीर्घकालिक विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश करते हैं। सरकार का जोर इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, शहरी विस्तार और निवेश को बढ़ावा देने पर रहा है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में मांग और सप्लाई दोनों पक्षों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

फाइनेंशियल डिसिप्लिन भी बेहतर होगा

बजट में एसेट मॉनेटाइजेशन और संस्थागत निवेश को बढ़ावा देने से डेवलपर्स की लिक्विडिटी स्थिति में सुधार होगा। तैयार परियोजनाओं से पूंजी जुटाने के विकल्प बढ़ने से कंस्ट्रक्शन साइकिल तेज होगी और समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे होमबायर्स का भरोसा मजबूत होने के साथ-साथ सेक्टर में फाइनेंशियल डिसिप्लिन भी बेहतर होगा।

नए रेजिडेंशियल कॉरिडोर विकसित होंगे

सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी पूंजीगत व्यय का सीधा असर रेजिडेंशियल और कमर्शियल रियल एस्टेट पर पड़ता दिख रहा है। मेट्रो, सड़क, एक्सप्रेसवे और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के विस्तार से शहरों का दायरा बढ़ेगा और नए रेजिडेंशियल कॉरिडोर विकसित होंगे। इसके साथ ही, ऑफिस स्पेस, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट में भी नई मांग देखने को मिल सकती है।

माइग्रेशन का दबाव बड़े महानगरों से कम हो सकता है

टियर-2 और टियर-3 शहरों में अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल गतिविधियों को बढ़ावा देने से इन क्षेत्रों में संगठित रियल एस्टेट विकास को गति मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी और रोजगार के नए अवसर स्थानीय आवासीय बाजार को मजबूत करेंगे और माइग्रेशन का दबाव बड़े महानगरों से कम हो सकता है।

रियल एस्टेट सेक्टर केवल विस्तार ही नहीं करेगा

इसके अलावा, बजट में ग्रीन एनर्जी, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं पर दिया गया फोकस यह संकेत देता है कि आने वाले समय में रियल एस्टेट सेक्टर केवल विस्तार ही नहीं करेगा, बल्कि गुणवत्ता और सस्टेनेबिलिटी के नए मानक भी स्थापित करेगा। कुल मिलाकर, यह बजट रियल एस्टेट सेक्टर को संतुलित और भरोसेमंद विकास की दिशा में आगे बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

रियल एस्टेट के लिए अच्छा संकेत

भूमिका ग्रुप के सीएमडी, उद्धव पोद्दार का कहना है कि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार ध्यान देना, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, रियल एस्टेट के लिए अच्छा संकेत है। सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनने से बड़े शहरों और उभरते शहरों के बीच आना-जाना आसान होगा। इससे इन रास्तों के आसपास नए घर और कमर्शियल प्रोजेक्ट विकसित होने के मौके बढ़ेंगे। कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उपकरणों को बेहतर बनाने की योजना से काम तेजी से होगा, प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे और डिलीवरी ज्यादा भरोसेमंद बनेगी। FY27 के लिए सरकार ने पब्लिक खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जिसका असर सड़कों, बिजली-पानी और शहरी सुविधाओं पर दिखेगा। इससे मेट्रो शहरों के बाहर भी विकास को रफ्तार मिलेगी। फाइनेंसिंग आसान होने से डेवलपर्स का भरोसा बढ़ेगा और बड़े निवेशक भी आगे आएंगे। इससे देश के उभरते शहरों में बेहतर प्लानिंग के साथ रियल एस्टेट विकास देखने को मिलेगा।

निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में करेंगे मदद

काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर, अमित मोदी का कहना है कि सरकार का कैपिटल खर्च ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाने का निर्णय इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास के प्रति लंबी अवधि की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, जो रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बहुत जरूरी है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और मेट्रो के बाहर नए रेजिडेंशियल मार्केट्स खुलेंगे। जैसे-जैसे ये शहर ग्रोथ कॉरिडोर में जुड़ेंगे, हम संगठित और योजनाबद्ध रियल एस्टेट विकास देखेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की शुरुआत इस इकोसिस्टम को और मजबूत करेगी, क्योंकि यह फंडिंग में भरोसा बढ़ाता है और लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स में जोखिम कम करता है। साथ में, बढ़ा हुआ कैपेक्स और रिस्क कम करने वाले उपाय प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने, संपत्ति की गुणवत्ता सुधारने और डेवलपर्स और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद करेंगे।

मजबूत रियल एस्टेट मार्केट की नींव

एक्स्पीरियन डेवलपर्स के वाइस चेयरमैन, बी.के. मलगी का कहना है कि बजट 2026 से सरकार यह दिखा रही है कि वह इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास के लिए लंबे समय तक प्रतिबद्ध है। लगातार सरकारी खर्च और बेहतर कंस्ट्रक्शन से बड़े प्रोजेक्ट्स मेट्रो और टियर-2, टियर-3 शहरों में ज्यादा मजबूत होंगे। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से जोखिम कम होगा, संपत्ति लंबे समय तक टिकेगी और उभरते शहर निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक होंगे। कनेक्टिविटी बढ़ने से घर, ऑफिस, लॉजिस्टिक्स हब और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स की मांग भी बढ़ेगी। फाइनेंसिंग में सुधार से रियल एस्टेट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ेगा। यह बजट लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत रियल एस्टेट मार्केट की नींव रखता है।

नए इलाकों में घर लेना ज्यादा आकर्षक बनेगा

सीआरसी ग्रुप के डायरेक्टर–मार्केटिंग एंड बिजनेस मैनेजमेंट,सलिल कुमार का कहना है कि घर खरीदने की मांग बढ़ाने में इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ा कारण है और बजट में इस पर दिया गया जोर मेट्रो शहरों और दूसरे इलाकों में प्रीमियम हाउसिंग का रुख बदल सकता है। ₹12.2 लाख करोड़ के सरकारी खर्च से सड़कों, मेट्रो और कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे शहरों के बाहर और नए इलाकों में घर लेना ज्यादा आकर्षक बनेगा। मेट्रो शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी वाले बाहरी इलाकों में बड़े और लग्ज़री प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ सकती है। लोग अब सिर्फ घर नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल चाहते हैं। कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों पर ध्यान देने से प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधरेगी और समय पर डिलीवरी भी आसान होगी। जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा भरोसा मजबूत होगा और फाइनेंसिंग आसान होगी, रियल एस्टेट सेक्टर में सट्टेबाज़ी के बजाय एंड-यूजर डिमांड बढ़ने की संभावना है। इससे अलग-अलग बाजारों में प्रीमियम रेजिडेंशियल सेगमेंट में ज्यादा टिकाऊ और बेहतर प्लानिंग के साथ विकास देखने को मिलेगा।

रियल एस्टेट का आधार करेगा मजबूत

ट्रेवॉक ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर,गुरपाल सिंह चावला का कहना है कि इस बजट में पूंजीगत खर्च और शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगातार जोर सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सिटी इकॉनोमिक रीजन (CERs) का परिचय, जिसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए विशेष फंडिंग है, मेट्रो के बाहर कनेक्टिविटी, नागरिक सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को सुधारने की दिशा में एक संरचित कदम है। भले ही तुरंत मांग पर असर सीमित हो, यह संरचनात्मक ध्यान धीरे-धीरे उभरते शहरी केंद्रों में रियल एस्टेट का आधार मजबूत करेगा।

प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा मिलेगा

मिगसन ग्रुप के एमडी, यश मिगलानी का कहना है कि यूनियन बजट 2026 टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास को लेकर मजबूत कदम है, क्योंकि यही शहर आगे चलकर शहरी और कमर्शियल ग्रोथ की अगली लहर बनेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स से ये बाजार संगठित कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए ज्यादा मजबूत बनेंगे। मिगसन ग्रुप के नजरिए से इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की शुरुआत एक अच्छा कदम है, क्योंकि इससे फंडिंग का जोखिम कम होगा और लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

निवेशकों के लिए अधिक भरोसेमंद

अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का कहना है कि, केंद्रीय बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट मॉनेटाइजेशन पर दिया गया जोर रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) को बढ़ावा मिलने से डेवलपर्स को तैयार और आय-उत्पादक परिसंपत्तियों से पूंजी जुटाने का अवसर मिलेगा, जिससे नई आवासीय और कमर्शियल परियोजनाओं को गति मिलेगी। टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट की मांग मजबूत होगी। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन प्रोजेक्ट्स पर सरकार का फोकस यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट सेक्टर न केवल ग्रोथ करेगा, बल्कि सस्टेनेबल और निवेशकों के लिए अधिक भरोसेमंद भी बनेगा।

रिटेल और ऑफिस स्पेस की बढ़ेगी मांग

सिक्का ग्रुप के चेयरमैन, हरविंदर सिंह सिक्का ने कहा कि, इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित बजट छोटे शहरों को नए ग्रोथ सेंटर के रूप में उभार रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, नियोजित विकास और सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स पर जोर से किफायती आवास, रिटेल और ऑफिस स्पेस की मांग तेजी से बढ़ेगी। ₹12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत खर्च और ग्रीन पहल जैसे कार्बन कैप्चर प्रोजेक्ट्स यह साफ संकेत देते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर अब लंबी अवधि की स्थिर, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है।

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