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सूनी हुई संगीत की दुनिया: मेरे सोना रे दे दूंगी जान जुदा मत होना...गाने वाली आशा ताई अपने फैंस को रुला गईंं...

Aryan
12 April 2026 3:14 PM IST
सूनी हुई संगीत की दुनिया: मेरे सोना रे दे दूंगी जान जुदा मत होना...गाने वाली आशा ताई  अपने फैंस को रुला गईंं...
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जो शोखियां आशा ताई के गले में थी वो शायद किसी के गले में नहीं थी।

मुंबई। आज का दिन संगीत प्रेमियों के लिए काला हो गया। आज यानी रविवार को आशा ताई का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। संगीत की दुनिया मानो थम सी गई हो। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। उनके बारे में जितना लिखा जाए कम है। एक तरफ गमगीन माहौल है तो दूसरी तरफ कानों में खनकती उनकी आवाज। मेरे सोना रे सोना दे दूंगी जान जुदा मत होना...गाने वाली आशा जी हम संगीत प्रेमियों से भले जुदा हो गई हों, लेकिन हमारे दिलों में हमेशा वो राज करेंगी।

चंचल शोख आवाज की धनी

दादा साहेब फाल्के और पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित आशा ताई की आवाज में एक अजीब किस्म की चंचलता के साथ ही कशिश थी। जो शोखियां आशा ताई के गले में थी वो शायद किसी के गले में नहीं थी। उन्होंने 14 भाषाओं में गीत गाकर 12000 हजार गीतों आवाज दी। किशोर कुमार हमेशा उनके मनपसंद गायक रहे।

लता दीदी के साथ फिल्मों में गाने की शुरुआत की

8 सितंबर 1933 को सांगली में जन्मीं आशा ने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ फिल्मों में गाना शुरू किया। महज 9 साल की उम्र में पिता का साया सर से उठ गया। पिता दीनानाथ मंगेशकर के निधन के बाद परिवार मुंबई आया। आशा ने 1943 में पहली बार मराठी फिल्म में गीत (चला चला नवबाला) गाया। इसके बाद 1948 में हिंदी फिल्म चुनरिया में गाना (सावन आया रे) गाया।

संगीत की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं

आशा ताई बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं। वो संगीत की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं। उनकी गायिकी मंत्रमुग्ध कर देने वाली थी। 2011 में आशा ताई का नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। वो संगीत के इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार बन गईं।

जीवन कठिन रहा

आशा ताई ने दशकों तक अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया, लेकिन उनकी असल जिंदगी काफी मुश्किलों और संघर्षों से भरी रही। 16 की उम्र में शादी, घरेलू हिंसा, बेटी की खुदकुशी और बेटे की मौत ने उनको तोड़ दिया था। बाहर से उनकी जिंदगी जितनी चमक-धमक भरी दिखती थी, हकीकत में उतनी थी नहीं। उनका नाता जीवन के गहरे दुखों और संघर्षों से रहा है।

‘सुरों की मल्लिका’ ने कभी नहीं मानी हार

सबसे खास बात यह है कि निजी जीवन में इतने उतार-चढ़ाव और अपनों को खोने के बाद भी ‘सुरों की मल्लिका’ आशा ताई ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने संगीत की दुनिया में अलग मुकाम हासिल किया।

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