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इस महाशिवरात्रि भगवान शिव को चढ़ाएं ये फूल, भोले को है अति प्रिय, जानें नाम

नई दिल्ली। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भोलेनाथ की पूजा में फूलों का विशेष महत्व है। इस खास अवसर पर देशभर के शिवालयों में पूजा-पाठ से लेकर भजन कीर्तन का दिव्य आयोजन किया जाता है। यही नहीं कुछ स्थानों पर शिव बारात भी निकाली जाती हैं, जो महादेव और देवी पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि, शिव-शक्ति के मिलन के शुभ अवसर पर पूजा पाठ, दान व उपवास रखने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शिव पुराण और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवजी को कुछ फूल अत्यंत प्रिय हैं, जबकि कुछ को अर्पित करना वर्जित माना गया है।
महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त 2026
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:39 से 09:45
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - सुबह 12:52 से 03:59
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - सुबह 03:59 से 07:06
महाशिवरात्रि पर कौन से फूल चढ़ाएं?
शिवजी को सादगी और सफेद रंग प्रिय है। आप इन फूलों को अर्पित कर सकते हैं।
धतूरा और इसके फूल: यह शिवजी को सबसे प्रिय है। इसे चढ़ाने से भय और विषैले विचारों से मुक्ति मिलती है।
आक (मदार/अकवन): सफेद आक के फूल शिवजी को बहुत भाते हैं। माना जाता है कि इसे चढ़ाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कनेर: सफेद और पीला कनेर शिव पूजा में बहुत शुभ माना जाता है।
शमी के फूल: शनि दोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए शमी के फूल और पत्ते चढ़ाए जाते हैं।
पारिजात (हरसिंगार): इसे चढ़ाने से जीवन में सुख और शांति आती है।
बेलपत्र: हालांकि यह पत्ता है, लेकिन इसके बिना शिव पूजा अधूरी है। यह अखंड और साफ होना चाहिए।
नीलकमल और सफेद कमल: आध्यात्मिक शांति के लिए कमल के फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं।
कौन से फूल न चढ़ाएं?
शास्त्रों के अनुसार, कुछ फूलों का उपयोग शिव पूजा में वर्जित है।
केतकी (केवड़ा): भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था क्योंकि उसने ब्रह्मा जी के एक झूठ में साथ दिया था।
चंपा: कुछ मान्यताओं के अनुसार चंपा के फूलों को भी शिव पूजा में शामिल नहीं किया जाता है।
कणेर (लाल): शिवजी को सफेद फूल प्रिय हैं, इसलिए गहरे लाल या बहुत अधिक सुगंध वाले फूलों से बचना चाहिए।
सूरजमुखी: यह सात्विक पूजा के अनुकूल नहीं माना जाता।
मुरझाए या बासी फूल: कभी भी बासी, कीड़े लगे या जमीन पर गिरे हुए फूल शिवलिंग पर न चढ़ाएं।
विशेष सावधानी
फूलों के साथ-साथ शिवजी को तुलसी, सिंदूर, और हल्दी भी नहीं चढ़ानी चाहिए क्योंकि ये स्त्रीत्व और सौंदर्य के प्रतीक हैं, जबकि महादेव वैरागी हैं।




