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माता के इस मंदिर का किसी वेद-पुराण में नहीं मिलता है कोई जिक्र, तो कैसे शुरू हुई उनकी महिमा की कहानी, जानें इतिहास

कटरा। माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। जहां माता वैष्णो देवी ने भैरवनाथ नामक तांत्रिक से बचने के लिए नौ महीने तक एक गुफा में तपस्या की थी। बता दें कि कि यह मंदिर कटरा के पास त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है। गुफा में तीन पिंडियां हैं, जो माता के तीन स्वरूपों - महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का प्रतिनिधित्व करती हैं। जिसे अब पवित्र गुफा के नाम से जाना जाता है, और अंत में उन्होंने भैरवनाथ का वध किया। यह मंदिर जिसे पंडित श्रीधर ने खोजा था। लाखों भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। जिसकी देखरेख श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड करता है।
पौराणिक कथा ( Bhairavnath की कथा)
माता वैष्णो देवी, जिन्हें बचपन में त्रिकुटा कहा जाता था ने भगवान राम के रूप में पृथ्वी पर आए विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या शुरू की। एक तांत्रिक भैरवनाथ माता की शक्ति से मोहित हो गया और उनका पीछा करने लगा। माता ने उससे बचने के लिए त्रिकुटा पर्वत की ओर प्रस्थान किया। माता ने अर्धकुवारी (गर्भजून) गुफा में नौ महीने तक तपस्या की, जहां वे एक भ्रूण की तरह सुरक्षित रहीं। इसी कारण इस गुफा को गर्भजून कहते हैं। अंत में, माता ने पवित्र गुफा में प्रवेश किया, और भैरवनाथ उनका पीछा करते हुए वहां पहुंच गया। तपस्या पूरी होने पर, माता ने तीन देवियों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) के रूप में भैरवनाथ का सिर काट दिया। मरते समय भैरवनाथ ने माफी मांगी, और माता ने उन्हें वरदान दिया कि उनके मंदिर में उनके सिर की पूजा भी होगी।
इतिहास और खोज
पंडित श्रीधर माता वैष्णो देवी के परम भक्त थे। माता ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर गुफा का रास्ता दिखाया और पिंडियों (तीन चट्टानों) के रूप में दर्शन दिए, जिसके बाद श्रीधर ने इस स्थान की खोज की और पूजा शुरू की। इस मंदिर का सबसे पहला उल्लेख महाभारत काल में मिलता है, जहां अर्जुन ने कृष्ण के निर्देश पर गुफा में ध्यान किया था। 1986 से, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड इस तीर्थयात्रा का प्रबंधन और संचालन कर रहा है, जिससे लाखों भक्तों की यात्रा आसान और सुरक्षित हो गई है।
महत्व
- यह उत्तरी भारत के सबसे पूजनीय स्थलों में से एक है और प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।
- इस यात्रा को पूरा करने के लिए भैरव बाबा के दर्शन भी आवश्यक माने जाते हैं, जिनके दर्शन के बिना माता के दर्शन अधूरे माने जाते हैं।




