Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

इस बार 15 जनवरी की सुबह खिचड़ी और दही-चूड़ा खाना माना जा रहा है उत्तम! जानिए इसका कारण

Shilpi Narayan
12 Jan 2026 5:30 PM IST
इस बार 15 जनवरी की सुबह खिचड़ी और दही-चूड़ा खाना माना जा रहा है उत्तम! जानिए इसका कारण
x

नई दिल्ली। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ने के कारण खिचड़ी और दही-चूड़ा खाने को लेकर भ्रम की स्थिति है। मकर संक्रांति को लेकर इस बार कन्फ्यूजन बना हुआ है। वजह है कि इस साल इस पर्व के साथ एकादशी तिथि पड़ रही है। लोग स्नान करते हैं, दान करते हैं और फिर खिचड़ी खाते हैं। बिहार में इस दिन दही-चूड़ा खाया जाता है। इन सारी परंपराओं और मान्यताओं के साथ एक मान्यता ये भी है एकादशी के दिन चावल नहीं खाया जाता है।

मकर संक्रांति और एकादशी का संयोग

तिथि: मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी।

संक्रांति क्षण: सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर 03:13 बजे होगा।

एकादशी का साया: षटतिला एकादशी का व्रत भी 14 जनवरी को ही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी पर चावल या अन्न का सेवन वर्जित माना जाता है।

खिचड़ी और दही-चूड़ा कब खाएं?

दही-चूड़ा और खिचड़ी (15 जनवरी): चूंकि 14 जनवरी को एकादशी तिथि शाम तक प्रभावी है और सूर्य का प्रवेश भी दोपहर बाद हो रहा है, इसलिए खिचड़ी और दही-चूड़ा 15 जनवरी 2026 की सुबह खाना सबसे उत्तम माना जा रहा है।

स्नान और दान (14 जनवरी): संक्रांति का मुख्य पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक रहेगा। इस समय पवित्र नदियों में स्नान और तिल, गुड़ या कंबल का दान करना शुभ है।

विशेष सावधानियां (14 जनवरी के लिए)

चावल का सेवन न करें: एकादशी के कारण इस दिन चावल से बनी खिचड़ी या चूड़ा खाने से बचना चाहिए।

दान के नियम: ज्योतिषियों के अनुसार, एकादशी पर चावल का दान वर्जित है। इसकी जगह आप तिल, गुड़, गरम कपड़े या सीधे फल-सब्जियों का दान कर सकते हैं।

खिचड़ी दान: यदि आप खिचड़ी का ही दान करना चाहते हैं, तो पंडितों के अनुसार इसे 14 जनवरी को दान (बिना पकाए) किया जा सकता है, लेकिन सेवन अगले दिन यानी 15 जनवरी को ही करना चाहिए।

Next Story