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इस साल GDP की रफ्तार 7.4% होने का अनुमान! मंहगाई से ऐसे मिलेगी राहत, जानें देश की अर्थिक स्थिति

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण लोकसभा के पटल पर रखा। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत की विकास दर मजबूत हुई है जबकि महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। वहीं मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की अगुवाई में बनी इस सर्वे रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की ताजा तस्वीर पेश की गई है।
सरकार का फोकस विकास को बढ़ावा
भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज होने का अनुमान है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5% थी, जिसके वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 7.4% होने का अनुमान है। यह कोविड-पूर्व के 6.4% के औसत से काफी बेहतर स्थिति है। वित्त वर्ष 2026-27 में देश की जीडीपी 6.8% से 7.4% तक रह सकती है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार महंगाई के मोर्चे पर आंकड़े थोड़े सुकून देने वाले हैं। प्रभावी पूंजीगत व्यय अब जीडीपी का 3.9% हो गया है, जो महामारी से पहले 2.7% था। यह बताता है कि सरकार का फोकस विकास को बढ़ावा देने वाले खर्चों पर है।
खर्च की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ
राजकोषीय अनुशासन में लगातार सुधार हुआ है। राजकोषीय घाटा, जो वित्त वर्ष 2021 में 9.2% के उच्च स्तर पर था, वह वित्त वर्ष 2025 में घटकर 4.8% (संशोधित अनुमान) पर आ गया है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसे और कम करके 4.4% (बजट अनुमान) पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। आर्थिक सलाहकार के अनुसार, सरकार ने न केवल राजकोषीय घाटा कम करने में सफलता पाई है, बल्कि खर्च की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
बेहतर अनुपालन के कारण टैक्स कलेक्शन बढ़ा
वहीं खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2023 में 6.7% थी, यह वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में घटकर मात्र 1.7% रह गई है। इसी तरह, कोर इन्फ्लेशन (सोना-चांदी को छोड़कर) भी गिरकर 2.9% (दिसंबर तक) पर आ गई है। अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और बेहतर अनुपालन के कारण टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। आयकरदाताओं की संख्या वित्त वर्ष 2022 के 6.9 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 9.2 करोड़ हो गई है। सकल कर राजस्व भी जीडीपी के 11.5% तक पहुंच गया है, जो महामारी से पहले 10.8% था।




