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आज प्रदोष काल में भगवान शिव की ऐसे करें आराधना, जानें व्रत से जुड़े नियम...

साल 2026 में चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत आज यानी सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार को होने के कारण इसे 'सोम प्रदोष व्रत' कहा जाएगा। प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा सूर्यास्त के समय की जाती है, जिसे 'प्रदोष काल' कहते हैं।
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए रखा जाने वाला एक विशेष व्रत है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तब उसे सोम प्रदोष कहा जाता है।
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
यह व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
मान्यता है कि इस व्रत से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
अविवाहित लोगों के लिए यह व्रत अच्छा जीवनसाथी पाने में सहायक माना जाता है।
विवाहित दंपत्ति के लिए वैवाहिक सुख और शांति के लिए भी रखा जाता है।
पूजा का समय (प्रदोष काल)
सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है।
इसी समय शिव पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।
पूजा विधि (संक्षेप में)
सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखा जाता है।
शाम को प्रदोष काल में शिव की पूजा करें।
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन चढ़ाएँ।
ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें और शिव आरती करें।
विशेष मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति करते हैं।




