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रमजान की मुकद्दस रात शब-ए-कद्र आज, जानें इसे क्यों कहा जाता है 'नाइट ऑफ पावर'

नई दिल्ली। रमजान का पाक महीना चल रहा है। रमजान की सबसे मुकद्दस रात शब-ए-कद्र को 'नाइट ऑफ पावर' कहा जाता है। हालांकि सभी सोचा है कि इसे ऐसा क्यों कहा जाता है। दरअसल अरबी भाषा में 'लैलतुल-क़द्र' का अर्थ 'शक्ति की रात' या 'महिमा की रात' होता है।
'नाइट ऑफ पावर' क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि इसी रात अल्लाह ने पैगंबर हजरत मुहम्मद (सअव) पर पवित्र ग्रंथ 'कुरान' को पहली बार नाज़िल (उतारना) करना शुरू किया था। कुरान के अनुसार, यह एक रात की इबादत 1,000 महीनों (लगभग 83 साल) की इबादत से भी अधिक मूल्यवान और बेहतर मानी जाती है।
मानी जाती है तकदीर की रात
इसे 'फैसले की रात' या 'भाग्य की रात' भी कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस रात आने वाले साल के लिए लोगों की तकदीर तय की जाती है। इस रात हजरत जिब्रील के नेतृत्व में अनगिनत फरिश्ते जमीन पर अल्लाह की शांति और रहमत का पैगाम लेकर उतरते हैं, जो फज्र (भोर) होने तक बनी रहती है।
2026 में शब-ए-कद्र कब है?
शब-ए-कद्र रमजान के आखिरी 10 दिनों की विषम रातों (21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं या 29वीं) में से कोई भी हो सकती है। हालांकि, भारत में मुख्य रूप से 27वीं रमजान की रात को शब-ए-कद्र माना जाता है, जो इस वर्ष 16 मार्च 2026 की शाम से 17 मार्च 2026 की सुबह तक मनाई जा रही है।




