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चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन करना पड़ सकता है भारी, इन पांच राज्यों में आचार संहिता लागू, इन चीजों पर लगा प्रतिबंध

नई दिल्ली। देश में पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इस घोषणा के साथ ही पूरे चुनावी माहौल में आचार संहिता लागू हो गई। आचार संहिता यानी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट ऐसे नियमों का एक सेट है, जिनका पालन चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों करना जरूरी होता है।
आचार संहिता लगाने का मकसद
इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाना है। जब भी चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान होता है, उसी समय से आचार संहिता लागू हो जाती है। यह नियमों और दिशा-निर्देशों का ऐसा ढांचा है जो चुनाव के दौरान राजनीतिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी राजनीतिक दल या नेता सरकारी संसाधनों का गलत इस्तेमाल न करे और सभी को बराबरी का मौका मिले।
समाज में मतभेद फैलाने पर प्रतिबंध
आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव प्रचार के दौरान जाति, धर्म, भाषा या किसी समुदाय के आधार पर लोगों को भड़काना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। राजनीतिक दल अपने विरोधियों की आलोचना तो कर सकते हैं, लेकिन यह आलोचना केवल उनकी नीतियों, कार्यक्रमों अथवा पिछले कामकाज को लेकर ही होनी चाहिए। किसी नेता के निजी जीवन, परिवार या बिना सबूत के आरोप लगाना नियमों के खिलाफ माना जाता है।
सत्तारूढ़ दल के लिए सख्त नियम
आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार के कामकाज पर भी कई तरह की सीमाएं लग जाती हैं। नई सरकारी योजनाओं या परियोजनाओं की घोषणा नहीं की जा सकती। किसी भी नई परियोजना का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं हो सकता। सरकारी गाड़ी, विमान, बंगला या सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। सरकारी पैसे से विज्ञापन देकर सरकार की उपलब्धियां दिखाना भी प्रतिबंधित रहता है।
रैलियां और सभाओं के नियम
चुनाव प्रचार के दौरान रैलियों और सभाओं के लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। किसी भी रैली या सभा के लिए पहले पुलिस से अनुमति लेना जरूरी होता है। सुबह 6 बजे से पहले और रात 10 बजे के बाद सार्वजनिक सभाएं नहीं की जा सकती है। लाउडस्पीकर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बंद रखना अनिवार्य है। मतदान से 48 घंटे पहले सभी तरह के चुनाव प्रचार को बंद करना पड़ता है।




