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क्या होता है रमजान का मतलब? जानिए इसके मायने और अहमियत

Anjali Tyagi
25 Feb 2026 8:00 AM IST
क्या होता है रमजान का मतलब? जानिए इसके मायने और अहमियत
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नई दिल्ली। इस वक्त रमजान का पाक महीना चल रहा है, जिसमें रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज है। इस्लाम में रमजान की अहमियत सबसे ज्यादा है और इसे सबसे अव्वल महीना माना गया है। रमजान (जिसे रमदान भी कहा जाता है) इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे दुनिया भर के मुसलमान सबसे पवित्र मानते हैं।

रमजान का अर्थ

'रमजान' शब्द अरबी भाषा के मूल शब्द 'रमिदा' या 'अर-रमद' से आया है, जिसका अर्थ है "चिलचिलाती गर्मी", "तपन" या "सूखापन"। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तरह तेज़ धूप से ज़मीन तपती है, उसी तरह इस महीने में इबादत और रोज़े रखने से इंसान के गुनाह (पाप) जलकर राख हो जाते हैं और उसका मन शुद्ध हो जाता है।

रमजान की अहमियत

यह महीना कई कारणों से महत्वपूर्ण है।

कुरान का अवतरण: मान्यता है कि इसी महीने की एक विशेष रात (लैलतुल कद्र) में अल्लाह ने पैगंबर मुहम्मद (स.) पर इस्लाम की पवित्र पुस्तक 'कुरान' नाजिल (उतारी) करना शुरू की थी।

इस्लाम का स्तंभ: रमजान के दौरान रोजा (सौम) रखना इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में से एक है, जो हर सेहतमंद वयस्क मुसलमान पर फर्ज (अनिवार्य) है।

आत्म-संयम और अनुशासन: यह महीना केवल भूखा-प्यासा रहने का नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का है। इसमें बुरा बोलने, बुरा देखने और गलत कामों से बचने की शिक्षा दी जाती है।

समानता और सहानुभूति: रोजा रखने से इंसान को भूख और प्यास की तड़प महसूस होती है, जिससे वह गरीबों और जरूरतमंदों का दर्द समझ पाता है। यह दान (ज़कात और सदक़ा) की भावना को बढ़ावा देता है।

इस पाक महीने की दिनचर्या में सूर्योदय से पहले सहरी (भोजन) करना और सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ रोजा खोलना शामिल है।

रमजान का मतलब इबादत

माह-ए-रमजान के असली मायने हैं इबादत करना। जो मुसलमान इस मुबारक महीने में इबादत करता है, उसका सवाब बाकी महीनों में की गई इबादत से दोगुना ज्यादा मिलता है। रमजान में नफ्ल पढ़ने का सवाब दूसरे महीने के फर्ज पढ़ने के बराबर हो जाता है। वहीं, रमजान में फर्ज पढ़ने का सवाब दूसरे महीनों के 70 फर्ज के बराबर हो जाता है। इसलिए इस पाक महीने में अपना ज्यादा वक्त मुसलमान को इबादत में ही लगाना चाहिए। इस महीने में नफ्ल का सवाब बहुत ज्यादा होने की वजह से ही रमजान में तरावीह पढ़ी जाती है।

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