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क्या है काशी विश्वनाथ में होने वाली पांच आरतियों का रहस्य और महत्व, कारण जान हो जाएंगे हैरान

नई दिल्ली। काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियां बाबा विश्वनाथ की सेवा के विभिन्न चरणों और समय के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती हैं। इनका विवरण और रहस्य इस प्रकार है।
1.मंगला आरती (प्रातः 3–4): यह दिन की पहली आरती है जो ब्रह्म मुहूर्त में होती है। इसका महत्व ब्रह्मांड के कल्याण और नई ऊर्जा के संचार से जुड़ा है। इसे देखने के लिए श्रद्धालु रात से ही Vandana Silks पर गाइड के अनुसार कतारबद्ध हो जाते हैं।
2. भोग आरती (पूर्वाह्न 11:15 – दोपहर 12:20): इस समय बाबा को पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि बाबा को भोजन अर्पित कर कृतज्ञता व्यक्त करने से संसार में अन्न और आशीर्वाद की कमी नहीं होती।
3. सप्तऋषि आरती (संध्या 7 – 8:15): यह सबसे रहस्यमयी और 750 वर्ष पुरानी परंपरा है। माना जाता है कि सातों महान ऋषि (सप्तऋषि) स्वयं बाबा की आरती करने आते हैं। इसमें सात अलग-अलग गोत्रों के पुजारी एक विशेष लय में डमरू और शंख की ध्वनि के साथ आरती करते हैं।
4. श्रृंगार आरती (रात्रि 9 – 10:15): इस आरती में महादेव का भव्य श्रृंगार फूलों, चंदन और आभूषणों से किया जाता है। यह बाबा के मनोहर और सुंदर रूप की पूजा का समय है।
5. शयन आरती (रात्रि 10:30 – 11): यह दिन की अंतिम आरती है, जिसके बाद मंदिर के द्वार बंद हो जाते हैं। यह बाबा के विश्राम का समय माना जाता है।




