Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

महिला और पुरुष के मिलन की कहानी क्या है, सृष्टि की उत्पति कैसे हुई, जानें इसके वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण

Aryan
27 March 2026 8:00 PM IST
महिला और पुरुष के मिलन की कहानी क्या है, सृष्टि की उत्पति कैसे हुई, जानें इसके वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण
x
विभिन्न धर्मों के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में प्रथम पुरुष और स्त्री के मिलन से ही मानव जाति का विस्तार हुआ है

नई दिल्ली। महिला और पुरुष का मिलन कैसे हुआ इसकी व्याख्या पौराणिक कथाओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण, दोनों माध्यमों से की गई है। दरअसल इसे लेकर कई पौराणिक कथाएं भी हैं और इसे लेकर कई वैज्ञानिक खुलासे भी किए गए हैं। एक नई स्टडी ने इस प्राचीन रहस्य का खुलासा किया है। स्टडी के मुताबिक ज्यादातर मामलों में निएंडरथल पुरुष और आधुनिक मानव महिलाओं से संबंध बनाए थे। आज भी अधिकतर लोगों में निएंडरथल डीएनए मौजूद है।

पौराणिक दृष्टिकोण

हिंदू धर्म की मान्यता

विभिन्न धर्मों के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में प्रथम पुरुष और स्त्री के मिलन से ही मानव जाति का विस्तार हुआ है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने अपने शरीर के दो भाग किए, जिससे प्रथम पुरुष मनु और प्रथम स्त्री शतरूपा का जन्म हुआ। ऐसा कहा जाता है कि इन दोनों के मिलन से ही संसार में मनुष्यों की उत्पत्ति हुई।

ईसाई और इस्लाम धर्म की मान्यता

इनके अनुसार ईश्वर ने पहले 'आदम' (Adam) को बनाया और फिर उनकी पसली से 'हव्वा' (Eve) की रचना की। उनके मिलन को ही मानवता की शुरुआत माना जाता है।

वैज्ञानिक और विकासवादी दृष्टिकोण

विज्ञान के अनुसार, यह मिलन लाखों वर्षों की क्रमिक विकास (Evolution) की प्रक्रिया का परिणाम है।

आकर्षण का विज्ञान:

वैज्ञानिकों के अनुसार, आदिमानव काल में स्त्री और पुरुष का मिलन केवल प्रजनन तक सीमित नहीं था। समय के साथ, शरीर द्वारा छोड़े गए विशेष रसायनों जिन्हें फेरोमोन्स (Pheromones) कहा जाता है, एक-दूसरे के प्रति आकर्षण पैदा करने में मुख्य भूमिका निभाई।

निएंडरथल पुरुष औऱ आधुनिक मानव महिलाओं के बीच शारीरिक सबंध

निएंडरथल के X क्रोमोसोम में आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) का डीएनए अधिक मिला लगभग 1.6 गुना ज्यादा। वहीं, आधुनिक मनुष्यों के X क्रोमोसोम में निएंडरथल डीएनए कम था। यह एक शारीरिक सबंध बनाने का तरीका था।

सामाजिक संरचना: जैसे-जैसे मानव मस्तिष्क का विकास हुआ, उन्होंने समूह में रहना सीखा। सुरक्षा और संसाधनों के बंटवारे की जरूरत ने स्त्री और पुरुष के बीच स्थायी संबंधों और विवाह जैसी सामाजिक व्यवस्थाओं को जन्म दिया।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अर्थ

वंश वृद्धि: धार्मिक और सामाजिक स्तर पर विवाह का मुख्य उद्देश्य धर्मपरायण संतान की प्राप्ति माना गया है ताकि सृष्टि का चक्र चलता रहे।

अर्धांगिनी भाव: आध्यात्मिक रूप से, पुरुष और स्त्री को एक-दूसरे का पूरक माना गया है, जहां वे मिलकर एक पूर्ण इकाई (अर्धांगिनी) बनते हैं।


Next Story