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जब एक खंडहर में रुकने के दौरान प्रेमानंद महाराज की छाती पर प्रेत बैठ गई थी...जानें भूत-प्रेत पर महाराज के विचार

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, भूत-प्रेत का अस्तित्व वास्तविक है। उन्होंने अपने प्रवचनों में स्पष्ट किया है कि जिस तरह मनुष्य योनि होती है, उसी तरह 'प्रेत योनि' भी एक सच्चाई है। महाराज के अनुसार, जो लोग आत्महत्या करते हैं, जिनकी अकाल मृत्यु (दुर्घटना) होती है या जो जीवन भर घोर पाप और अधर्म के कार्यों में लिप्त रहते हैं, उनकी आत्मा प्रेत योनि में जाती है।
अपवित्र आचरण या गलत कामों में लगे रहते हैं
उन्होंने काशी (वाराणसी) के अपने पुराने दिनों का एक किस्सा सुनाया है जब एक खंडहर में रुकने के दौरान एक भारी शक्ति (प्रेत) उनकी छाती पर बैठ गई थी। उन्होंने बताया कि उस समय वे जागृत अवस्था में थे और मंत्र जप कर रहे थे। महाराज बताते हैं कि भूतों का प्रभाव अक्सर उन लोगों पर जल्दी पड़ता है जो 'तमोगुणी' होते हैं, यानी जो अपवित्र आचरण या गलत कामों में लगे रहते हैं।
बचने का उपाय
उनका कहना है कि जो व्यक्ति निरंतर भगवन नाम जप (जैसे राधा-राधा या कृष्ण-कृष्ण) करता है या हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसका भूत-प्रेत कुछ नहीं बिगाड़ सकते। नाम की शक्ति के आगे नकारात्मक ऊर्जा टिक नहीं पाती। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि कुछ 'पवित्र प्रेत' भी होते हैं जो केवल अपनी मुक्ति के लिए संतों के सानिध्य में आने का प्रयास करते हैं, इसलिए उनसे डरने की जरूरत नहीं है।




