Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य समाचार

रमजान की शुरुआत कब से हुई! क्या पैगंबर मोहम्मद से पहले भी रखे जाते थे रोजे?

Anjali Tyagi
27 Feb 2026 7:00 AM IST
रमजान की शुरुआत कब से हुई! क्या पैगंबर मोहम्मद से पहले भी रखे जाते थे रोजे?
x

नई दिल्ली। मुसलमानों के लिए रमज़ान के रोज़े हिजरत (मक्का से मदीना प्रवास) के दूसरे वर्ष यानी 624 ईस्वी में अनिवार्य (फर्ज़) किए गए थे।

पैगंबर मोहम्मद से पहले रोजा रखा जाता था?

रोजा रखने की परंपरा मानव इतिहास में बहुत पुरानी है, लेकिन इस्लाम में इसे व्यवस्थित रूप से लागू करने के अलग-अलग चरण रहे हैं।

औपचारिक शुरुआत (हिजरी 2): इस्लाम में रमज़ान के रोज़े 624 ईस्वी (हिजरत के दूसरे वर्ष) में अनिवार्य (फर्ज़) किए गए थे। पैगंबर मुहम्मद और उनके अनुयायियों के मक्का से मदीना प्रवास के बाद, कुरान की सूरह अल-बकराह की आयतों के ज़रिए यह आदेश आया।

इस्लाम से पहले की परंपरा: इस्लाम के आगमन से पहले भी अरब में रोज़ा रखने का चलन था। कुरान (2:183) में ज़िक्र है कि रोज़ा पिछली उम्मतों (समुदायों) पर भी अनिवार्य था।

हज़रत आदम: माना जाता है कि धरती पर आने के बाद हज़रत आदम हर महीने की 13, 14 और 15 तारीख को रोज़ा रखते थे।

आशूरा का रोज़ा: मदीना पहुंचने पर पैगंबर ने देखा कि यहूदी समुदाय मूसा अलैहिस्सलाम की जीत की याद में 10 मुहर्रम (आशूरा) को रोज़ा रखते थे। इसके बाद मुसलमानों ने भी इसे अपनाया, जो बाद में रमज़ान के रोज़े फर्ज़ होने पर वैकल्पिक (नफ्ल) हो गया।

धार्मिक महत्व: रमजान के महीने को इसलिए चुना गया क्योंकि इसी महीने में मक्का की हीरा गुफा में पैगंबर मुहम्मद पर कुरान की पहली आयत नाजिल (अवतरित) हुई थी।

रमजान की अहमियत

रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौंवा महीना होता है। ये एक ऐसी रूहानी सफर होता है, जो ईमान वालों को तकवा, सब्र, शुक्र और हमदर्दी की तालीम देता है। इस्लाम की सबसे पाक किताब कुरान शरीफ में रमजान की अहमियत बयान की गई है। रमजान मुबारक का महीना इस लिहाज से भी अहम है, क्योंकि इसमें कुरान मजीद की आयतों का आसमान से उतरना शुरू हुआ। पैगंबर मुहम्मद साहब को कुरान की आयतें रमजान के महीने में नाजिल होनी शुरू हुई थी। इसके बाद 23 सालों में कुरान शरीफ का आसमान से दुनिया में उतरना मुकम्मल हुआ।

नियमों में बदलाव

पूर्ववर्ती समुदायों में रोजे के नियम और समय अलग हो सकते थे। इस्लाम में रमज़ान के पूरे महीने के रोजे और सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय निर्धारित किया गया।

Next Story