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23 या 24 फरवरी, कब शुरू होगा होलाष्टक? इन बातों का रखें ध्यान, जानें इसे क्यों माना जाता है अशुभ?

नई दिल्ली। वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी, मंगलवार से शुरू होगा। हालांकि कुछ गणनाओं के अनुसार इसकी शुरुआत 23 फरवरी से भी मानी जा रही है, लेकिन अधिकांश पंचांग फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के आधार पर 24 फरवरी को ही इसका प्रारंभ बता रहे हैं। होलाष्टक का समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के साथ होगा और 4 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी।
होलाष्टक के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
होलाष्टक के 8 दिनों को हिंदू धर्म में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है क्योंकि इस दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है और नकारात्मक ऊर्जा प्रबल होती है।
इन कार्यों से बचें (मनाही)
मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, मुंडन, और उपनयन संस्कार जैसे समारोह न करें।
नया निर्माण/प्रवेश: नए घर का निर्माण शुरू करना या गृह प्रवेश वर्जित है।
व्यापार की शुरुआत: कोई नया व्यवसाय या महत्वपूर्ण व्यावसायिक डील इन दिनों में टाल देनी चाहिए।
खरीद-बिक्री: नया वाहन, भूमि, या भवन खरीदना शुभ नहीं माना जाता।
विदाई: नवविवाहिता की पहली विदाई भी होलाष्टक में नहीं की जाती है।
क्या करना शुभ है?
भक्ति और तप: इन दिनों में भगवान विष्णु की आराधना, हनुमान चालीसा का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और धन का दान करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।
होलाष्टक क्यों माना जाता है अशुभ?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन 8 दिनों में राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को भीषण यातनाएं दी थीं। प्रह्लाद के उन कष्टों को याद करते हुए इन दिनों में कोई भी उत्सव या खुशी का कार्य नहीं किया जाता।




