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दलाई लामा को धर्मगुरु होने के बावजूद भी क्यों मिला 'ग्रैमी अवार्ड'? जानें 25 साल की उम्र में कौन सी उपलब्धि कर ली थी हासिल...

नई दिल्ली। दलाई लामा को हाल ही में 68वें ग्रैमी अवार्ड्स (2026) में संगीत जगत का सबसे बड़ा सम्मान मिला है। एक धर्मगुरु होने के बावजूद उन्हें यह पुरस्कार उनके आध्यात्मिक संदेशों को एक नए माध्यम से दुनिया तक पहुंचाने के लिए दिया गया है। बता दें कि 90 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला ग्रैमी जीता, जहां उन्होंने मशहूर कॉमेडियन ट्रेवर नोआ जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।
दलाई लामा को ग्रैमी अवार्ड मिला
1. प्रोजेक्ट का नाम- उन्हें यह पुरस्कार उनके ऑडियो एल्बम (Audiobook) ‘Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama’ के लिए मिला है।
2. कैटेगरी- उन्होंने 'बेस्ट ऑडियो बुक, नरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग' (Best Audio Book, Narration & Storytelling Recording) श्रेणी में यह जीत हासिल की।
3. क्या है खासियत- इस एल्बम में उनके शांति, करुणा और माइंडफुलनेस से जुड़े 10 उपदेशों को संगीत के साथ पिरोया गया है। इसमें प्रसिद्ध भारतीय संगीतकार पंडित शिवकुमार शर्मा और हरिहरन का संगीत भी शामिल है।
25 की उम्र में हासिल की थी यह बड़ी डिग्री
जानकारी के मुताबिक दलाई लामा न केवल एक आध्यात्मिक नेता हैं, बल्कि बौद्ध दर्शन के बहुत बड़े विद्वान भी हैं। महज 25 साल की उम्र में (वर्ष 1959) उन्होंने बौद्ध दर्शन में 'गेशे ल्हारम्पा' (Geshe Lharampa) की डिग्री प्राप्त की थी। यह तिब्बती बौद्ध धर्म की सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि है, जिसे बौद्ध दर्शन में 'डॉक्टरेट' (Doctorate of Buddhist Philosophy) के समकक्ष माना जाता है।
कठिन परीक्षा
उन्होंने यह डिग्री तिब्बत के ल्हासा में वार्षिक 'मोन्लम' उत्सव के दौरान हजारों विद्वानों के सामने हुई कठिन बहस और परीक्षा (Viva) को पास करने के बाद हासिल की थी।
उन्होंने अपनी इस जीत को व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर इसे 'साझा वैश्विक जिम्मेदारी' की पहचान बताया है।




