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भगवान राम ने क्यों हनुमान जी के ऊपर छोड़ दिया था ब्रह्मास्त्र!रामायण का यह प्रसंग सुन हो जाएंगे आप भी हैरान

नई दिल्ली। हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त वो आज भी इस धरती पर वास कर रहे हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम ने हनुमान जी को मृत्युदंड देने की आज्ञा दी थी, जिसके पीछे मुख्य कारण ऋषि विश्वामित्र का क्रोध और हनुमान जी की अथाह भक्ति थी।
अपमान का कारण
एक बार सभी महान ऋषि और राजा अयोध्या में एकत्रित हुए थे। नारद मुनि के उकसाने पर, हनुमान जी ने सभा में आए सभी ऋषियों का अभिवादन किया, लेकिन ऋषि विश्वामित्र को प्रणाम नहीं किया। नारद मुनि ने हनुमान जी से कहा था कि विश्वामित्र एक राजा थे। इसलिए उन्हें ऋषियों की तरह सम्मान देने की आवश्यकता नहीं है। जब विश्वामित्र को लगा कि हनुमान जी ने जानबूझकर उनका अपमान किया है, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने भगवान राम से कहा कि उनके शिष्य हनुमान ने उनकी अवहेलना की है, इसलिए राम को उन्हें मृत्युदंड देना होगा।
श्री राम की विवशता
श्री राम अपने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा को टाल नहीं सकते थे, इसलिए भारी मन से उन्होंने हनुमान जी पर वार करने का निर्णय लिया। हनुमान जी को जब अपनी भूल का अहसास हुआ, तो वे बिना किसी प्रतिरोध के एक स्थान पर बैठकर निरंतर 'राम नाम' का जाप करने लगे। राम ने उन पर कई बाण चलाए, लेकिन राम नाम के प्रभाव से एक भी बाण हनुमान जी का बाल भी बांका नहीं कर पाया।
ब्रह्मास्त्र का प्रयोग
अंत में, गुरु की आज्ञा का पालन करने के लिए भगवान राम ने हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया। लेकिन वह परम विनाशकारी शस्त्र भी हनुमान जी के पास जाकर शांत हो गया क्योंकि वे राम नाम की शक्ति में लीन थे। यह देखकर नारद मुनि ने विश्वामित्र को पूरी घटना की सच्चाई बताई, जिसके बाद विश्वामित्र ने अपना आदेश वापस ले लिया और हनुमान जी को क्षमा कर दिया। यह कथा सिद्ध करती है कि 'राम से बड़ा राम का नाम' है।




