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होलाष्टक में शिव ने कामदेव को क्यों किया भस्म, जानें क्या है रोचक कथा

कामदेव को शिव ने क्यों किया भस्म?
पुराणों के अनुसार, जब भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे, तब देवताओं ने उन्हें पार्वती से विवाह के लिए प्रेरित करने हेतु कामदेव को भेजा। उद्देश्य था कि शिव और पार्वती के पुत्र से तारकासुर नामक असुर का वध हो सके।
घटना कैसे हुई?
कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने के लिए उन पर प्रेम-बाण चलाया।
शिव की ध्यानावस्था भंग हुई और वे क्रोधित हो उठे।
उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोला।
तीसरे नेत्र की अग्नि से कामदेव भस्म हो गए।
होलाष्टक से संबंध
कई लोकमान्यताओं में माना जाता है कि यह घटना होलाष्टक के समय हुई थी।
होलाष्टक, होली से पहले के 8 दिन होते हैं।
इन दिनों को कुछ स्थानों पर शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है।
कामदेव-दहन की कथा भी इन्हीं दिनों से जोड़ी जाती है, विशेषकर उत्तर भारत में।
कामदेव की पत्नी ने किया विलाप
कामदेव की पत्नी रति के विलाप से शिव का हृदय पिघल गया।
शिव ने कामदेव को अनंग (देह-रहित) रूप में पुनर्जीवित कर दिया।
इसलिए कामदेव को 'अनंग' भी कहा जाता है, अर्थात बिना शरीर के भी प्रेम की शक्ति का अस्तित्व।




