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प्रेमी से मिलने जाने पर क्यों नहीं लगता है डर! क्या प्यार में बढ़ जाती है जोखिम लेने की क्षमता

प्रेमी से मिलने पर डर न लगने के पीछे ठोस मनोवैज्ञानिक और जैविक (Biological) कारण होते हैं। जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ होते हैं जिससे आप प्यार करते हैं, तो आपका मस्तिष्क और शरीर एक "सुरक्षा कवच" की तरह काम करने लगता है। हालांकि एक स्वस्थ रिश्ते में जब आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपको बिना किसी जजमेंट के स्वीकार करता है, तो वहां डर की जगह भरोसा ले लेता है।
दिमाग के 'डर वाले हिस्से' का शांत होना
शोध बताते हैं कि रोमांटिक प्रेम के दौरान मस्तिष्क का एमिग्डाला (Amygdala) हिस्सा, जो डर और तनाव के लिए जिम्मेदार होता है, उसकी सक्रियता कम हो जाती है। इस वजह से आप उस व्यक्ति की मौजूदगी में सुरक्षित महसूस करते हैं।
ऑक्सीटोसिन (Oxytocin)
इसे 'लव हॉर्मोन' कहा जाता है। यह विश्वास बढ़ाता है और डर को कम करता है, जिससे आप अपने साथी के साथ भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं।
डोपामाइन (Dopamine)
यह हॉर्मोन खुशी और उत्साह (Euphoria) पैदा करता है। यह आपके दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को सक्रिय कर देता है, जिससे मिलने की खुशी किसी भी संभावित डर या खतरे के अहसास पर भारी पड़ जाती है।
जोखिम लेने की क्षमता
प्यार में होने पर मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex), जो तर्क और निर्णय लेने का काम करता है, थोड़ा सुस्त हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्ति सामाजिक डर या खतरों की परवाह किए बिना जोखिम उठाने के लिए तैयार रहता है।




