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इस्लाम धर्म में लंबी पैंट पहनना गुनाह क्यों माना गया है, जानें नमाज के कुछ खास एहतराम के बारे में...

Aryan
13 March 2026 8:30 PM IST
इस्लाम धर्म में लंबी पैंट पहनना गुनाह क्यों माना गया है, जानें नमाज के कुछ खास एहतराम के बारे में...
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नमाज पढ़ने के लिए इस्लाम के अपने नियम-कायदे होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखना जरूरी होता है

नई दिल्ली। इस्लाम धर्म मुख्य रुप से पांच पाये पर आधारित है, जिनमें शहादत, नमाज, जकात, रोजा और हज की बात आती है। इन पांचों धर्म को निभाना हर सच्चे मुसलमान का फर्ज है। इस्लाम के मुताबिक पांच वक्त की नमाज जरूरी कही गई है, जो हर मुसलमान को निभाना चाहिए होता है। नमाज पढ़ने के लिए इस्लाम के अपने नियम-कायदे होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखना जरूरी होता है। नमाज के कुछ एहतराम भी तय किए गए हैं। जैसे, साफ-सुथरी जगह, पाकीजगी, कपड़े से बदन ढकना, नियत इत्यादि। इनमें से एक खास एहतराम मतलब मर्यादा मुस्लिम मर्दों के लिए तय किया गया है और वो है एंकल के ऊपर तक पजामा पहनना।

लंबी पैंट पहनकर नमाज कबूल होती है या नहीं

ऐसा अक्सर देखा जाता है अधिकांश मुसलमान ऊंचा पजामा पहनते हैं। लेकिन महिलाएं एंकल से नीचे तक कपड़े पहनती हैं। कई लोग सोचते हैं कि मुसलमान मर्दों के लिए लंबा पजामा पहनना गलत क्यों माना गया है। इस्लाम में दरअसल इसे पर बताया गया है कि लंबी पैंट पहनकर नमाज कबूल होती है या नहीं।

एंकल से नीचे पजामा पहनना

दरअसल इस्लाम में मर्दों के लिए टखने से नीचे पैंट पहनना हराम माना गया है। इसको अहंकार, घमंड और शेखीबाजी की निशानी समझा जाता है। जानकारी के मुताबिक, पैगंबर मुहम्मद ने कहा है कि कपड़े का जो भी हिस्सा टखनों से नीचे लटकता है, वो जहन्नुम की आग में जलेगा।

कपड़ा जमीन को न छुए

इस्लाम में पुरुष के लिए टखनों (ankles) से नीचे पजामा पहनना अहंकार और दिखावे की पहचान माना जाता है, जिससे मुसलमानों को बचने की सलाह दी गई है। यदि कोई मुसलमान टखने से नीचे की पैंट पहनता है, तो उसके लिए जरूरी है कि वो इस चीज का ध्यान रखे कि चलते समय कपड़ा जमीन को नहीं छुए।

नमाज पढ़ने में होती है आसानी

हदीस के मुताबिक, जो आदमी दिखावे के लिए टखनों से नीचे कपड़े पहनता है, अल्लाह उसे पसंद नहीं करता है। ऐसा कहते हैं कि पैगंबर मोहम्मद कपड़े टखनों से ऊंचे रखते थे, इसलिए इसे सुन्नत माना जाता है। टखनों से ऊपर पजामा पहनने से कपड़े जमीन की गंदगी से बचते हैं, जो नमाज पढ़ने के लिए जरूरी है।

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