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भारत के युवाओं में क्यों बढ़ रहा है लिव-इन रिलेशनशिप का क्रेज! जानें शादी से पहले इसे क्यों देखते हैं 'ट्रायल रन' के रूप में...

भारत के युवाओं, विशेषकर शहरी क्षेत्रों (Metros) में लिव-इन रिलेशनशिप का बढ़ता चलन केवल एक "फैशन" नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का परिणाम है। 2025-26 के हालिया रुझानों और अदालती टिप्पणियों के अनुसार, इसके मुख्य कारण कई हैं।
कंपैटिबिलिटी की परख (Test of Compatibility)
युवा इसे शादी से पहले एक "ट्रायल रन" की तरह देखते हैं। साथ रहकर वे एक-दूसरे की आदतों, स्वभाव और लाइफस्टाइल को गहराई से समझ पाते हैं, जिससे भविष्य में गलत जीवनसाथी चुनने का जोखिम कम हो जाता है।
आर्थिक स्वतंत्रता और करियर (Financial Independence & Career)
महिलाएं अब आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं और अपने रिश्तों के फैसले खुद ले रही हैं। साथ ही, करियर की व्यस्तताओं के कारण युवा शादी जैसी बड़ी जिम्मेदारी को फिलहाल टालकर साथ रहने को प्राथमिकता देते हैं।
कानूनी मान्यता और सुरक्षा (Legal Recognition)
भारत में बालिगों के लिए लिव-इन रिलेशनशिप पूरी तरह से कानूनी है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स (जैसे दिल्ली और इलाहाबाद हाई कोर्ट) ने इसे अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता' का हिस्सा माना है।
शादी की जटिलताओं से बचाव (Avoiding Complexities)
शादी में सामाजिक और पारिवारिक दबाव अधिक होता है। लिव-इन में कपल्स को आपसी सहमति से अलग होने की स्वतंत्रता रहती है, जिसमें तलाक जैसी लंबी कानूनी प्रक्रियाओं का झंझट नहीं होता।
शहरीकरण और प्रवासन (Urbanization & Migration)
बड़े शहरों में अकेले रहने वाले युवा, जो अपने परिवारों से दूर हैं, भावनात्मक सुरक्षा (Emotional Security) और खर्चों को बांटने के लिए लिव-इन का विकल्प चुनते हैं।
पश्चिमी प्रभाव और पॉप कल्चर (Media Influence)
फिल्मों और वेब सीरीज ने इस तरह के रिश्तों को सामान्य (Normalize) बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
कानूनी स्थिति (Status in 2026)
लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत सुरक्षा प्राप्त है। वहीं इस रिश्ते से पैदा हुए बच्चे कानूनी रूप से वैध माने जाते हैं और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में अधिकार प्राप्त है।




