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अंतिम संस्कार के समय शव के सिर पर क्यों मारा जाता है तीन बार डंडा, जानें क्या होती है कपाल क्रिया

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के समय बहुत सी प्रक्रिया की जाती है। जिनसे से कई के बारे में हमें जानकारी होती है मगर कुछ का कई ज्ञान नहीं होता है। बता दें कि इंसान की मृत्यु के बाद शव के सिर पर तीन बार डंडा मारा जाता है। शव के सिर पर तीन बार डंडा मारने की प्रक्रिया को कपाल क्रिया कहा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इस क्रिया के बिना अंतिम संस्कार पूर्ण नहीं माना जाता।
कपाल क्रिया न करने के परिणाम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कपाल क्रिया नहीं की जाती है, तो निम्नलिखित परेशानियां हो सकती हैं। माना जाता है कि कपाल क्रिया के बाद ही प्राण पूर्ण रूप से स्वतंत्र होते हैं और परलोक की यात्रा पर निकल पाते हैं। इसके बिना आत्मा शरीर और संसार के मोह में फंसी रह सकती है। ऐसी मान्यता है कि यदि कपाल (खोपड़ी) अधूरी रह जाती है, तो मृतक का अगले जन्म में मानसिक या शारीरिक विकास पूर्ण नहीं हो पाता और वह अविकसित रह सकता है। कपाल क्रिया मस्तिष्क की स्मृतियों को नष्ट करने के लिए की जाती है। इसके अभाव में व्यक्ति अगले जन्म में भी पिछले जन्म की बातें याद रख सकता है, जो उसके नए जीवन में बाधा बनती हैं। एक प्रचलित मान्यता यह भी है कि यदि खोपड़ी को पूरी तरह नष्ट न किया जाए, तो तांत्रिक या अघोरी उसका उपयोग तंत्र विद्या और सिद्धियां प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं, जिससे आत्मा को मोक्ष मिलना असंभव हो जाता है।
यह क्रिया क्यों की जाती है? (धार्मिक एवं वैज्ञानिक कारण)
ब्रह्मरंध्र का खुलना: सिर के ऊपरी भाग में 'ब्रह्मरंध्र' होता है, जिसे मोक्ष का द्वार माना जाता है। डंडे के प्रहार से इसे खोलकर आत्मा की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।
कठोर हड्डी का जलना: वैज्ञानिक दृष्टि से, मानव शरीर में सिर की हड्डी सबसे मजबूत होती है। इसे डंडे से तोड़कर उसमें घी डाला जाता है ताकि वह बाकी शरीर के साथ पूरी तरह जलकर भस्म हो सके




