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देव ऋषि नारद को क्यों कहा जाता है सबसे पहला पत्रकार? जानें इसके पीछे की कहानी

नई दिल्ली। आज के समय में पत्रकारिता एक प्रचलित क्षेत्र और बातों के आदान-प्रदान का सबसे सटीक माध्यम है। बता दें कि देवर्षि नारद को हिंदू पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में सृष्टि का पहला पत्रकार माना जाता है क्योंकि वे तीनों लोकों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान का मुख्य माध्यम थे।
तीनों लोकों में संवाद का सेतु
नारद मुनि को आकाश (देव लोक), पृथ्वी और पाताल लोक में स्वतंत्र रूप से विचरण करने का वरदान प्राप्त था। वे एक लोक की खबरों को दूसरे लोक तक पहुँचाने का कार्य करते थे, जो आज की पत्रकारिता का मूल आधार है।
त्वरित और सटीक सूचना
वे घटनाओं की जानकारी स्वयं देखकर और समझकर देते थे, जिसे आधुनिक पत्रकारिता में प्रत्यक्ष और सत्य आधारित रिपोर्टिंग कहा जाता है।
लोक कल्याण का ध्येय
नारद मुनि का मुख्य उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और जनमानस का कल्याण करना था। उदाहरण के लिए, उन्होंने ही महर्षि वाल्मीकि को रामायण लिखने की प्रेरणा दी थी।
बिना भेदभाव सूचना का प्रसार
वे देवताओं, मनुष्यों और यहां तक कि असुरों को भी आवश्यक सूचनाएं देते थे। वे राजाओं और देवताओं से कठिन प्रश्न पूछने में भी संकोच नहीं करते थे, जो एक निर्भीक पत्रकार का गुण है।
देवताओं के संदेशवाहक
शास्त्रों में उन्हें 'वेदों का संदेशवाहक' और 'देवताओं का मुख्य दूत' बताया गया है। भारत में उनके इसी योगदान को सम्मान देने के लिए नारद जयंती को 'पत्रकार दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है।




