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श्रीराम के मस्तक पर सूर्य तिलक का समय आज दोपहर 12 बजे ही क्यों रखा गया? जानें इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक व्यवस्था

नई दिल्ली। आज अयोध्या में रघुवंशी श्रीराम के मस्तक पर सूर्य की किरणों ने तिलक कर दिया है। यह सिर्फ एक दृश्य नहीं है बल्कि भावनाओं और प्रेम का प्रतीक है। प्रभु का सौंदर्य मन मोहता है, मानो सारी सृष्टि टक-टकी लगाए बस इसी नजारे के इंतजार में बैठा था। यह दिव्य दृश्य 4 मिनट तक रहा। यह सूर्य तिलक दोपहर करीब 12 बजे किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आकिर इसी समय ही क्यों भगवान का सूर्य तिलक क्यों किया गया था।
भगवान राम का जन्म समय
पौराणिक मान्यताओं और वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान श्री राम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ठीक दोपहर 12 बजे हुआ था। शास्त्रों के अनुसार, दोपहर 11:45 से 12:45 के बीच का समय 'अभिजीत मुहूर्त' कहलाता है, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसी मुहूर्त में भगवान राम का प्राकट्य हुआ था।
सूर्यवंशी परंपरा
प्रभु राम सूर्यवंशी हैं (उनके वंश का संबंध सूर्य देव से है)। दोपहर 12 बजे सूर्य अपने पूर्ण तेज के साथ आकाश के उच्चतम बिंदु पर होता है, जिसे उनके वंशज (सूर्य देव) द्वारा अपने आराध्य का राज्याभिषेक या वंदन माना जाता है।
वैज्ञानिक व्यवस्था
CSIR-CBRI रुड़की के वैज्ञानिकों ने दर्पणों और लेंसों का एक ऐसा तंत्र तैयार किया है जो सूर्य की किरणों को सटीक रूप से दोपहर 12 बजे रामलला के मस्तक पर केंद्रित करता है।




