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Chandra Grahan 2026: आखिर ग्रहण के दौरान क्यों नहीं करनी चाहिए कोई भी यात्रा! जानें शास्त्रों से जुड़ा ये नियम

नई दिल्ली। शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान यात्रा करने से बचना चाहिए। इस समय को आध्यात्मिक रूप से संवेदनशील और सामान्य कार्यों के लिए अशुभ माना गया है। हिंदू परंपरा में सूर्य और चंद्र ग्रहण को सामान्य खगोलीय घटना भर नहीं माना जाता, बल्कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण समय समझा जाता है।
ग्रहण काल क्यों माना जाता है संवेदनशील?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब राहु-केतु सूर्य या चंद्रमा को ग्रसित करते हैं, तब वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसी कारण ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतने, जप-तप करने और अनावश्यक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
यात्रा न करने के मुख्य कारण
नकारात्मक ऊर्जा: मान्यता है कि ग्रहण के समय ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जो मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है।
कार्यों की निष्फलता: शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में किए गए कर्मों का पूर्ण फल नहीं मिलता; वे कम फलदायी या निष्फल हो सकते हैं।
बाधाओं की आशंका: ज्योतिषीय दृष्टि से इस अवधि में शुरू की गई यात्राओं में देरी, दुर्घटना या अन्य बाधाएं आने की संभावना रहती है।
निर्णय क्षमता पर प्रभाव: माना जाता है कि ग्रहण के दौरान थकान या मानसिक तनाव हो सकता है, जिससे यात्रा के दौरान सही निर्णय लेना कठिन हो जाता है।
यदि यात्रा करना अनिवार्य हो तो क्या करें?
अगर किन्हीं कारणों से यात्रा टालना संभव न हो, तो शास्त्रों में कुछ उपाय बताए गए हैं:
ईश्वर स्मरण: घर से निकलने से पहले इष्ट देव का ध्यान करें और सुरक्षा की प्रार्थना करें।
शुद्धि स्नान: यात्रा से लौटने के बाद स्नान अवश्य करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही पूजा-पाठ या अन्य कार्य करें।
मंत्र जाप: यात्रा के दौरान मन ही मन मंत्रों का जाप करते रहें ताकि नकारात्मक प्रभाव कम हो सके।
दान-पुण्य: ग्रहण समाप्त होने के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान दें।
विशेष सावधानी
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बाहर निकलने या यात्रा करने से सख्त परहेज करना चाहिए।




