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सरकार से बड़ा धर्म पद देंगे... शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अलंकार अग्निहोत्री को दिया प्रस्ताव!

Aryan
27 Jan 2026 12:07 PM IST
सरकार से बड़ा धर्म पद देंगे... शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अलंकार अग्निहोत्री को दिया प्रस्ताव!
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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 5 पेज का एक पत्र लिखा है, जिसमें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया है।

बरेली। यूजीसी के नए कानून और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बटुक शिष्‍यों पर लाठीचार्ज के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्‍ट्रेट पद से इस्‍तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री बीते कल से सुर्खियों में छाए हुए हैं। बता दें कि अबतक उनका इस्‍तीफा स्‍वीकार नहीं किया गया है और उन्‍हें अनुशासनहीनता के आरोप में सस्‍पेंड कर दिया गया है। इस कड़ी में माघ मेले में मौजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने फोन पर अलंकार अग्निहोत्री से बातचीत की। उन्‍होंने कहा कि जो पद सरकार ने दिया था, उससे बड़ा पद धर्म के क्षेत्र में हम आपको देने का प्रस्ताव रख रहे हैं।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लंकार अग्निहोत्री से की बात

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि मैं दुखी हो रहा हूं कि आपने कितनी लगन से पढ़ाई-लिखाई की होगी, इसके बाद आप इस पद तक पहुंच पाए। लेकिन एक झटके में आपका यह पद चला गया। लेकिन आपने जिस तरह से सनातन धर्म और इनके प्रतीकों के प्रति निष्ठा का प्रदर्शन किया है। उससे पूरा सनातन समाज बेहद प्रसन्न है। मैं आपका अभिनंदन करता हूं। हम चाहते हैं कि आप जैसे निष्ठावान लोग सनातन की सेवा के लिए आगे आएं। जो पद सरकार के द्वारा आपको दिया गया था, उससे बड़ा पद धर्म क्षेत्र में हम आपको देने के लिए प्रस्तावित करते हैं।

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 5 पेज का लिखा पत्र

दरअसल बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 5 पेज का एक पत्र लिखा है, जिसमें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया है। पत्र में उन्होंने लिखा कि वह यूजीसी के नए कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित घटनाओं से आहात हैं। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों से सवर्ण बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसके अलावा अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज का अपमान हैं और इससे संदेश जाता है कि प्रशासन और सरकार साधु-संतों के प्रति संवेदनशील नहीं है।

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