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सालों बाद युवराज सिंह ने रिटायरमेंट पर दिया बड़ा बयान! कहा-क्रिकेट से दूर होने का फैसला अचानक नहीं...

Shilpi Narayan
29 Jan 2026 5:30 PM IST
सालों बाद युवराज सिंह ने रिटायरमेंट पर दिया बड़ा बयान! कहा-क्रिकेट से दूर होने का फैसला अचानक नहीं...
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नई दिल्ली। युवराज सिंह गिनती आज भी भारत के महान ऑलराउंडरों में होती है। युवराज सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से कई बार टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कई ऐसे रिकार्ड बनाए किसको आज भी ध्वस्त कर पाना मुश्किल है। भारत को 2007 का T20 वर्ल्ड कप और 2011 में ODI वर्ल्ड कप जिताने में भी युवराज की अहम भूमिका रही। 2011 वर्ल्ड कप में वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे। वर्ल्ड कप के तुरंत बाद पता चला कि उन्हें कैंसर है और फिर कई महीनों के लिए वह मैदान से दूर हो गए।

क्रिकेट जगत को चौंकाया

करीब एक साल तक अस्पताल के बिस्तर पर जूझने के बाद युवराज न केवल कैंसर को हराने में सफल रहे बल्कि पूरी तरह से फिट होकर टीम इंडिया में वापसी की। हालांकि कैंसर को हराने के बाद उनका करियर फिर वैसा नहीं रहा, जो पहले था। वह टीम में अंदर-बाहर होते रहे और आखिरकार उन्होंने जून 2019 में इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान करते हुए क्रिकेट जगत को चौंका दिया। संन्यास के लगभग 7 साल बाद अब युवराज सिंह का अपने रिटायरमेंट को लेकर बड़ा बयान आया है। उन्होंने अपने इस बयान में संन्यास की बड़ी वजह का खुलासा किया है।

क्रिकेट से दूर होने का फैसला अचानक नहीं था

युवराज सिंह ने भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के साथ बातचीत में रिटायरमेंट को लेकर दिल खोलकर बात की। युवराज ने सानिया मिर्जा के पॉडकास्ट 'सर्विंग इट अप विद सानिया' पर बातचीत के दौरान बताया कि क्रिकेट से दूर होने का फैसला अचानक नहीं था, बल्कि यह लंबे समय तक शारीरिक थकान और मानसिक थकावट का नतीजा था। युवराज ने यह भी बताया कि जिस पल उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना बंद किया, उन्हें तुरंत राहत महसूस हुई। जो बोझ वह उठा रहे थे, वह हट गया, जिससे वह खेल के दबाव से दूर खुद से दोबारा जुड़ पाए।

उन्हें अपने गेम में मजा नहीं आ रहा था

युवराज ने कहा कि उन्हें अपने गेम में मजा नहीं आ रहा था। वह सोच रहे थे कि जब उन्हें क्रिकेट खेलने में मजा नहीं आ रहा है, तो वह क्यों खेल रहे हैं। उन्हें सपोर्ट महसूस नहीं हो रहा था। उन्हें इज्जत महसूस नहीं हो रही थी। 2011 वर्ल्ड कप के हीरो ने आगे कहा कि खुद को साबित करने की लगातार जरूरत ने मुकाबले के मजे को कम कर दिया था। क्रिकेट, जो कभी पहचान और जुनून का जरिया था, अब एक मजबूरी लगने लगा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना बेस्ट दिया है। वह ऐसी चीज से क्यों चिपका हुए हैं, जिसमें उन्हें मजा नहीं आ रहा? उन्हें खुद को साबित करने के लिए खेलने की क्या जरूरत है? उन्होंने आगे कहा कि जिस दिन उन्होंने खेलना बंद किया, वह फिर से पहले जैसा हो गए। हम सभी उस दौर से गुजरते हैं।

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