16 या 17 फरवरी, कब लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं?
नई दिल्ली। वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, मंगलवार को लगेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे खगोलीय भाषा में 'रिंग ऑफ फायर' (आग का छल्ला) कहा जाता है। इस दिन फाल्गुन महीने की अमावस्या भी है, तो सवाल उठता है कि क्या ग्रहण के दौरान अमावस्या की पूजा की जा सकती है या नहीं।
समय और दृश्यता
यह ग्रहण दोपहर लगभग 12:31 PM पर शुरू होगा और शाम 5:12 PM से 5:42 PM के बीच अपने चरम (Peak) पर रहेगा। ग्रहण का समापन शाम 7:57 PM के आसपास होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, चिली और अर्जेंटीना जैसे दक्षिणी गोलार्ध के देशों में दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
क्या ग्रहण के दौरान पूजा कर सकते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहण भारत में दिखाई देता है तभी सूतक काल लागू होता है। क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि फाल्गुन अमावस्या का व्रत रखा जा सकता है और पूजा-पाठ भी किया जा सकता है। किसी भी शुभ कार्य में रुकावट नहीं मानी जाएगी।
सूतक काल मान्य होगा या नहीं?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल केवल वहीं प्रभावी होता है जहाँ ग्रहण खुली आंखों से दिखाई देता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा। लोग सामान्य रूप से अपनी दैनिक पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य कर सकते हैं; मंदिरों के कपाट भी खुले रहेंगे।
ज्योतिषीय महत्व
भले ही यह भारत में दिखाई न दे, लेकिन ज्योतिष विद्वानों के अनुसार यह कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है, जिससे विभिन्न राशियों पर इसका सूक्ष्म प्रभाव पड़ सकता है।