कल हनुमान जयंती! जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, भोग और बजरंगबली के शक्तिशाली मंत्र
नई दिल्ली। हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) का पर्व चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व 2 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन अंजनी पुत्र हनुमान जी का जन्म हुआ था। ऐसे में पूजा का शुभ मुहूर्त, भोग और पूजा विधि क्या है।
शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल की सुबह से शुरू होकर 2 अप्रैल की सुबह तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार मुख्य पूजा 2 अप्रैल को होगी।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:30 से 05:15 तक।
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 06:10 से 07:44 तक (सबसे उत्तम)।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:50 तक (अपेक्षित)।
सायंकाल पूजा मुहूर्त: शाम 06:39 से रात 08:06 तक।
पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या नारंगी रंग के वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ ही राम दरबार की तस्वीर भी रखें क्योंकि राम जी की पूजा के बिना हनुमान पूजा अधूरी मानी जाती है।
- बजरंगबली को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर (चोला) अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
- अंत में कपूर या घी के दीपक से आरती करें।
प्रिय भोग
बजरंगबली को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, गुड़-चना, केला और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) के साथ भोग लगाना चाहिए।
प्रिय रंग
हनुमान जी को लाल और नारंगी (सिंदूरी) रंग अत्यंत प्रिय है।
फूल
पूजा में लाल गुलाब, गेंदा या कनेर के फूल अर्पित करें।
बजरंगबली के शक्तिशाली मंत्र
पूजा के दौरान या बाद में इन मंत्रों का जाप करें:
मूल मंत्र: ॐ हं हनुमते नमः
बीज मंत्र: ॐ ऐं भ्रीम हनुमते, श्री राम दूताय नमः
रक्षा मंत्र: अंजनीगर्भ संभूत कपीन्द्र रामवल्लभ। धरणीगर्भ संभूतं रक्ष मां अंजनीसुत॥
मनोजवम मंत्र: मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥