भारत का इकलौता मंदिर...जहां पत्नी के साथ पूजे जाते हैं हनुमान जी, जानें कहां है स्थित और कथा
यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं
नई दिल्ली। हनुमान जयंती का पर्व आज यानी गुरूवार को पूरे देश में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भक्त हनुमान जी पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा गया है, मतलब उन्होंने कभी विवाह नहीं किया है। लेकिन, बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि भारत में एक ऐसा मंदिर है, जहां हनुमान जी की पूजा उनकी पत्नी सुवर्चला के साथ की जाती है। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर के पीछे कुछ खास मान्यता है।
खम्मम जिले के एलंदु गांव में स्थित है यह मंदिर
तेलंगाना के खम्मम जिले के एलंदु गांव में श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर स्थित है, जहां हनुमान जी के साथ उनकी पत्नी सुवर्चला देवी की भी पूजा की जाती है। मंदिर के पुजारी के मुताबिक यह पूरे देश में इकलौता इकलौता मंदिर है, जहां हनुमान जी की पूजा उनकी पत्नी के साथ की जाती है। इस मंदिर का निर्माण साल 2006 में किया गया था और तब से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है।
विवाहोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है
हर साल ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी के दिन यहां हनुमान जी के विवाह का उत्सव भी बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। सबसे खास बात यह है कि जहां उत्तर भारत में हनुमान जी को ब्रह्मचारी माना जाता है, वहीं इस मंदिर की परंपरा लोगों के लिए काफी अनोखी मानी जाती है।
भगवान सूर्य हनुमान जी के गुरू थे
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी ने भगवान सूर्य को अपना गुरु माना था और उनसे शिक्षा प्राप्त की थी। ऐसा कहा जाता है कि सूर्य देव के पास कुल नौ प्रकार की विद्या थी, जिन्हें हनुमान जी सीखना चाहते थे। उन्होंने सूर्य देव से शिक्षा लेना शुरू किया और पांच विद्याओं का ज्ञान प्राप्त भी कर लिया लेकिन, जब हनुमान जी ने बाकी बची हुई चार विद्याओं को सीखने की इच्छा जताई, तो सूर्य देव ने एक शर्त रख दी। उन्होंने बताया कि ये चार विद्याएं सिर्फ उसी व्यक्ति को दी जा सकती हैं, जो गृहस्थ जीवन जीता हो। चूंकि, हनुमान जी ब्रह्मचारी थे, इसलिए इन विद्दयाओं को देना संभव नहीं था।
सूर्य देव ने बताया था उपाय
इसलिए सूर्य देव ने हनुमान जी को एक उपाय बताया। उन्होंने हनुमान जी से कहा कि अगर वे विवाह कर लें, तो उन्हें पूरी शिक्षा दी जा सकती है। शुरुआत में हनुमान जी इसके लिए तैयार नहीं हुए, क्योंकि वे एक बाल ब्रह्मचारी थे। तब सूर्य देव ने उन्हें समझाया कि उनकी पुत्री सुवर्चला से विवाह करने के बाद भी वे अपने ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर सकते हैं। इस बात पर हनुमान जी सहमत हो गए और उनका विवाह सुवर्चला देवी से करवा दिया।