Republic day 2026: भारत-पाकिस्तान में राष्ट्रपति की बग्घी के लिए हुआ था टॉस! हारते ही पाक के पास होती शाही बग्घी, जानें क्या है दिलचस्प किस्सा

Update: 2026-01-26 08:30 GMT

नई दिल्ली। 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो रहा था, तब केवल जमीन ही नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों का भी बंटवारा होना था। इसी दौरान वायसराय के बेड़े में शामिल शानदार काली 'प्रेसिडेंशियल बग्घी' को लेकर विवाद खड़ा हो गया। भारत और पाकिस्तान, दोनों ही इसे अपने पास रखना चाहते थे। बता दें कि इसका समाधान निकालने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया गया। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के अवसर पर राष्ट्रपति की उस ऐतिहासिक बग्घी का किस्सा फिर चर्चा में है, जिसे पाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच 'सिक्का' उछालकर फैसला किया गया था।

सिक्का उछालकर हुआ फैसला

इस विवाद को सुलझाने के लिए भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन के अंगरक्षकों के बीच एक टॉस (सिक्का उछालना) आयोजित किया गया। इस टॉस में भारत की ओर से कर्नल ठाकुर गोविंद सिंह और पाकिस्तान की ओर से साहिबजादा याकूब खान शामिल हुए थे। किस्मत भारत के साथ थी और कर्नल ठाकुर गोविंद सिंह ने यह टॉस जीत लिया। टॉस जीतने के साथ ही यह ऐतिहासिक बग्घी भारत के पास रह गई। तब से यह बग्घी राष्ट्रपति भवन की शान बनी हुई है।

बग्घी की विशेषताएं

राष्ट्रपति की यह बग्घी अंग्रेजी दौर की विरासत है। भी वायसराय इसी बग्घी में सवार होकर सरकारी कार्यक्रमों में पहुंचते थे।इसकी बनावट बेहद भव्य है।बग्घी पर सोने की परत चढ़ी हुई है और दोनों ओर भारत का राष्ट्रीय चिन्ह भी सोने से ही जड़ा हुआ है।इसे खींचने वाले घोड़े भी खास तौर पर चुने जाते हैं।पहले इस बग्घी को छह ऑस्ट्रेलियाई घोड़े खींचते थे, लेकिन अब परंपरा के अनुसार चार घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

कई वर्षों तक सुरक्षा कारणों से इसका उपयोग बंद रहने के बाद, 2014 में इसे फिर से शुरू किया गया था। 2024 में 75वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसी बग्घी में बैठकर समारोह में शिरकत की थी, और 2026 में भी यह हमारी लोकतांत्रिक विरासत के एक गौरवशाली प्रतीक के रूप में मौजूद है। 

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