सैलरी में अब तक नहीं जुड़ा 8वें वेतन आयोग का पैसा, जानें सरकार को कितना अधिक देना होगा एरियर...

हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है। 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था। इसी आधार पर यह तय किया गया कि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग अपने आप लागू हो जाएगा।

Update: 2026-01-20 10:30 GMT

नई दिल्ली। साल 2026 की शुरूआत होते ही लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को लगा कि अब सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी। सोशल मीडिया और दफ्तरों में चर्चाएं होती रहीं कि 7वें वेतन आयोग की अवधि खत्म होते ही नया वेतन 8 वें वेतन आयोग के हिसाब से लागू हो जाएगा। लेकिन महीना बीतने को है, न सैलरी बढ़ी और न पेंशन में कोई बदलाव हुआ। वहीं, अब लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किस बात की देर हो रही है, सरकार कर्मचारियों को कब पैसा देगी।

8वें वेतन आयोग को लेकर फैला भ्रम

दरअसल में हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है। 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था। इसी आधार पर यह तय किया गया कि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग अपने आप लागू हो जाएगा। लेकिन यह केवल एक अनुमान था। जानकारी के अनुसार, वेतन बढ़ाने का कोई ऑटोमैटिक सिस्टम नहीं होता है।

सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ेगा असर

बता दें कि आठवां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से लागू होना था, लेकिन अब जनवरी खत्म होने को है, लेकिन इस विषय पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग के लागू होने में देरी होने का असर 2026-27 के बजट के साथ ही आने वाले सालों में सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ेगा।

ICRA ने कहा कि वेतन आयोग का असर तुरंत तो नहीं दिखेगा, बल्कि FY28 में दिखेगा। जब सरकार को इसे 1 जनवरी 2026 से लागू करने के हिसाब से 15 महीने अथवा उससे अधिक का एरियर साथ में देना होगा। इस वजह से सरकारी खर्च पर दबाव बढ़ेगा। जानकारी के मुताबिक, FY28 में अकेले सैलरी पर खर्च 40-50 परसेंट तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पहले 7वें वेतन आयोग के लागू होने में केवल छह महीने की देरी हुई थी, तो सैलरी पर खर्च में 20 परसेंट की वृद्धि हुई थी।

सैलरी अपने आप नहीं बढ़ती

गौरतलब है कि वेतन आयोग की प्रक्रिया लंबी होती है। पहले सरकार वेतन आयोग का गठन करती है। फिर आयोग कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन करता है। इसके बाद अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपता है। सरकार उन सिफारिशों को सोच समझ कर मंजूरी देती है। इसके बाद ही नई सैलरी स्ट्रक्चर लागू होती है। इस कारण 7वें वेतन आयोग का समय खत्म होने से भी सैलरी अपने आप नहीं बढ़ी।

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