शिव के माथे पर चंद्रमा का होना सिर्फ विष ही नहीं, दक्ष से जुड़ा श्राप भी है वजह, जानें भोले के चंद्रशेखर स्वरूप का सच

Update: 2026-02-13 02:30 GMT

नई दिल्ली। भगवान शिव को लेकर कई कहानियां और रोचक तथ्य रहे है। ऐसा ही एक रोचक तथ्य ये है कि शिव के मस्तक पर चंद्रमा का होना केवल हलाहल विष की शीतलता का कारण ही नहीं है। बल्कि प्रजापति दक्ष के श्राप से जुड़ी एक गहरा पौराणिक कथा भी है।

भेदभाव का श्राप

प्रजापति दक्ष की 27 पुत्रियां (नक्षत्र) चंद्रमा से विवाहित थीं, लेकिन चंद्रमा केवल रोहिणी से ही विशेष प्रेम करते थे और अन्य पत्नियों की उपेक्षा करते थे। पुत्रियों के दुख से क्रोधित होकर दक्ष ने चंद्रमा को 'क्षय रोग' (दिन-ब-दिन क्षीण होने) का श्राप दे दिया।

शिव की शरण

श्राप के कारण जब चंद्रमा का अस्तित्व समाप्त होने लगा, तब उन्होंने ब्रह्मा जी की सलाह पर शिव की कठोर तपस्या की।

चंद्रशेखर स्वरूप

चूंकि दक्ष का श्राप पूरी तरह निष्फल नहीं किया जा सकता था, इसलिए भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया। इससे चंद्रमा 15 दिन घटते हैं (कृष्ण पक्ष) और शिव की कृपा से पुनः 15 दिन बढ़ते हैं (शुक्ल पक्ष)।

यही कारण है कि भगवान शिव को 'चंद्रशेखर' (जिनके शिखर पर चंद्रमा हो) और 'सोमनाथ' भी कहा जाता है। जिस स्थान पर चंद्रमा ने तपस्या की थी, उसे आज हम प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर के रूप में पूजते हैं।

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