दुनिया का वो अजीबोगरीब गांव, जहां रहते थे केवल बौने लोग! जानें क्या है नाम
नई दिल्ली। हमने बचपन में गुलिवर के दिलचस्प सफर वाली कहानियां तो जरूर पढ़ी होंगी। वही कहानियां जिसमें जब गुलिवर लिलिपुट नाम के एक द्वीप पर पहुंच गया था। वहां 15 सेंटीमीटर लंबाई वाले लोगों ने उसे बंदी बना लिया था। बता दें कि अब से करीब डेढ़ सौ साल पहले ईरान के एक गांव में बौने लोग रहते थे। यह गांव अपनी अनोखी बनावट और इतिहास के कारण 'बौनों के शहर' के रूप में प्रसिद्ध है।
कद की विशिष्टता
आज से लगभग एक शताब्दी पहले तक, इस गांव के निवासियों की लंबाई सामान्य इंसानों से काफी कम (लगभग 3 फीट तक) होती थी। गांव के घर बहुत ही छोटे और कम ऊंचाई वाले हैं। इनके दरवाजे इतने छोटे हैं कि अंदर जाने के लिए झुकना पड़ता है। इन घरों को स्थानीय पत्थरों और मिट्टी से बनाया गया है ताकि वे सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडे रहें।
बौनेपन का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, सदियों तक बाहरी दुनिया से कटाव, कुपोषण और पीने के पानी में पारे की मौजूदगी के कारण यहां के लोगों का कद छोटा रह गया था।
आधुनिक बदलाव
20वीं सदी के मध्य में जब मुख्य सड़कों का निर्माण हुआ और खानपान में सुधार आया, तो अगली पीढ़ियों का कद सामान्य होने लगा। आज यह गांव एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां लोग प्राचीन वास्तुकला और इस रहस्यमयी इतिहास को देखने आते हैं।
इलाके के लोग शाकाहारी थे
माखुनिक ईरान के दूरदराज़ का एक सूखा इलाका है। यहां चंद अनाज, जौ, शलजम, बेर और खजूर जैसे फल की ही खेती होती थी। इस इलाके के लोग पूरी तरह से शाकाहारी थे। शरीर के विकास के लिए जिन पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है वो इस इलाके के लोगों को नहीं मिल पाते थे। यही वजह थी कि यहां के लोगों का शारीरिक विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता था।
ईरान में चाय का चलन बड़े पैमाने पर है, लेकिन माखुनिक गांव के लोग चाय का सेवन अपनी शान के खिलाफ समझते थे। माना जाता था कि जो लोग अफीम का नशा करते थे वही नशेड़ी चाय भी पिया करते थे।