शंकराचार्य ने कहा कि एक ऐसी घटना घटित हुई जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि माघ मेला में स्नान करना उनके लिए केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था का विषय था।