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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने व्यथित मन से बिना स्नान किए माघ मेला छोड़ने का किया ऐलान! कहा-दुखी मन से लौट रहा हूं, इसकी कल्पना नहीं की थी...

Aryan
28 Jan 2026 1:06 PM IST
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने व्यथित मन से बिना स्नान किए माघ मेला छोड़ने का किया ऐलान! कहा-दुखी मन से लौट रहा हूं, इसकी कल्पना नहीं की थी...
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शंकराचार्य ने कहा कि एक ऐसी घटना घटित हुई जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि माघ मेला में स्नान करना उनके लिए केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था का विषय था।

प्रयागराज। प्रयागराज में चल रहे माघ मेला से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने व्यथित होकर विदा लेने की घोषणा की है। आज यानी बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह आस्था और श्रद्धा का भाव को लेकर माघ मेला में आए थे, लेकिन ऐसी परिस्थितियां बनेगी उन्होंने नहीं सोचा था। उन्होंने कहा कि प्रयागराज सनातन परंपराओं के लिए जानी जाती है। लेकिन यहां से बिना स्नान किए लौटना उनके लिए बेहद दुखद है। बता दें कि उनके इस फैसले के बाद से संत समाज के बीच चर्चा तेज हो गई है।

स्नान करना आस्था का विषय

शंकराचार्य ने कहा कि एक ऐसी घटना घटित हुई जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। इस घटना से उनका मन व्यथित हो गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि माघ मेला में स्नान करना उनके लिए केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था का विषय था। लेकिन मौजूदा हालात में उन्होंने माघ मेला छोड़ने का निर्णय लिया है।

अन्याय को अस्वीकार किया है हमने

शंकराचार्य ने कहा कि हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय का इंतजार करेंगे। लेकिन आज बोझिल मन से आवाज लड़खड़ा रही है। प्रयागराज की घटना ने हमारी आत्मा को झकझोर दिया है। संगम में स्नान किए बिना विदा ले रहे हैं। आज हम यहां से जा रहे हैं लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज छोड़कर जा रहे हैं।

दस दिन तक हम बैठे फुटपाथ पर

सबसे खास है कि जिसके लिए दस दिन तक हम फुटपाथ पर बैठे रहे लंबा वक्त दिया लेकिन दस ग्यारह दिन बीत जाने के बाद जब जाने का निर्णय लिया तब ऐसा प्रस्ताव सामने आया लेकिन हमने स्वीकार नहीं किया। यदि कर लेता तो हमारे भक्तों का अपमान होता।

मुगलकाल दोहराया गया

शंकराचार्य ने कहा जो मुगलों के समय मे हुआ आज हो रहा है। एक ओर गृहमंत्री का बयान आया जो सरकार संतों का अपमान करेगी स्थायी नहीं होगी। आज यहां अपमान हुआ इस तरह का दोहरा चरित्र का मतलब समझ नहीं आ रहा है।

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